1उसकी आंखें उन कबूतरों के समान हैं जो दुध में नहा कर नदी के किनारे अपने झुण्ड में एक कतार से बैठे हुए हों।
2उसके गाल फूलों की फुलवारी और बलसान की उभरी हुई क्यारियां हैं। उसके होंठ सोसन फूल हैं जिन से पिघला हुआ गन्धरस टपकता है॥
3उसके हाथ फीरोजा जड़े हुए सोने के किवाड़ हैं। उसका शरीर नीलम के फूलों से जड़े हुए हाथीदांत का काम है।
4उसके पांव कुन्दन पर बैठाये हुए संगमर्मर के खम्भे हैं। वह देखने में लबानोन और सुन्दरता में देवदार के वृक्षों के समान मनोहर है।
5उसकी वाणी अति मधुर है, हां वह परम सुन्दर है। हे यरूशलेम की पुत्रियो, यही मेरा प्रेमी और यही मेरा मित्र है॥

6हे स्त्रियों में परम सुन्दरी, तेरा प्रेमी कहां गया? तेरा प्रेमी कहां चला गया कि हम तेरे संग उसको ढूंढने निकलें?
7मेरा प्रेमी अपनी बारी में अर्थात बलसान की क्यारियों की ओर गया है, कि बारी में अपनी भेड़-बकरियां चराए और सोसन फूल बटोरे।
8मैं अपने प्रेमी की हूं और मेरा प्रेमी मेरा है, वह अपनी भेड़-बकरियां सोसन फूलों के बीच चराता है।
9हे मेरी प्रिय, तू तिर्सा की नाईं सुन्दरी है तू यरूशलेम के समान रूपवान है, और पताका फहराती हुई सेना के तुल्य भयंकर है।
10अपनी आंखें मेरी ओर से फेर ले, क्योंकि मैं उन से घबराता हूं; तेरे बाल ऐसी बकरियों के झुण्ड के समान हैं, जो गिलाद की ढलान पर लेटी हुई देख पड़ती हों।

11तेरे दांत ऐसी भेड़ों के झुण्ड के समान हैं जिन्हें स्नान कराया गया हो, उन में प्रत्येक दो दो जुड़वा बच्चे देती हैं, जिन में से किसी का साथी नहीं मरा।
12तेरे कपोल तेरी लटों के नीचे अनार की फाँक से देख पड़ते हैं।
13वहां साठ रानियां और अस्सी रखेलियां और असंख्य कुमारियां भी हैं।
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