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Psalms

His Mercy Endureth For Ever

Psalms 136·Hindi Bible

1याह ने तो याकूब को अपने लिये चुना है, अर्थात इस्राएल को अपने निज धन होने के लिये चुन लिया है।

2मैं तो जानता हूं कि हमारा प्रभु यहोवा सब देवताओं से महान है।

3जो कुछ यहोवा ने चाहा उसे उसने आकाश और पृथ्वी और समुद्र और सब गहिरे स्थानों में किया है।

4वह पृथ्वी की छोर से कुहरे उठाता है, और वर्षा के लिये बिजली बनाता है, और पवन को अपने भण्डार में से निकालता है।

5उसने मिस्त्र में क्या मनुष्य क्या पशु, सब के पहिलौठों को मार डाला!

Psalms 136 illustration - Psalms Chapter 136

6हे मिस्त्र, उसने तेरे बीच में फिरौन और उसके सब कर्मचारियों के बीच चिन्ह और चमत्कार किए।

7उसने बहुत सी जातियां नाश की, और सामर्थी राजाओं को,

8अर्थात एमोरियों के राजा सीहोन को, और बाशान के राजा ओग को, और कनान के सब राजाओं को घात किया;

9और उनके देश को बांट कर, अपनी प्रजा इस्राएल के भाग होने के लिये दे दिया॥

10हे यहोवा, तेरा नाम सदा स्थिर है, हे यहोवा जिस नाम से तेरा स्मरण होता है, वह पीढ़ी- पीढ़ी बना रहेगा।

Psalms 136 illustration - Psalms Chapter 136

11यहोवा तो अपनी प्रजा का न्याय चुकाएगा, और अपने दासों की दुर्दशा देख कर तरस खाएगा।

12अन्यजातियों की मूरतें सोना- चान्दी ही हैं, वे मनुष्यों की बनाईं हुई हैं।

13उनके मुंह तो रहता है, परन्तु वे बोल नहीं सकतीं, उनके आंखें तो रहती हैं, परन्तु वे देख नहीं सकतीं,

14उनके कान तो रहते हैं, परन्तु वे सुन नहीं सकतीं, न उनके कुछ भी सांस चलती है।

15जैसी वे हैं वैसे ही उनके बनाने वाले भी हैं; और उन पर सब भरोसा रखने वाले भी वैसे ही हो जाएंगे!

Psalms 136 illustration - Psalms Chapter 136

16हे इस्राएल के घराने यहोवा को धन्य कह! हे हारून के घराने यहोवा को धन्य कह!

17हे लेवी के घराने यहोवा को धन्य कह! हे यहोवा के डरवैयो यहोवा को धन्य कहो!

18यहोवा जो यरूशलेम में वास करता है, उसे सिय्योन में धन्य कहा जावे! याह की स्तुति करो!

19यहोवा का धन्यवाद करो, क्योंकि वह भला है, और उसकी करूणा सदा की है।

20जो ईश्वरों का परमेश्वर है, उसका धन्यवाद करो, उसकी करूणा सदा की है।

Psalms 136 illustration - Psalms Chapter 136

21जो प्रभुओं का प्रभु है, उसका धन्यवाद करो, उसकी करूणा सदा की है॥

22उसको छोड़कर कोई बड़े बड़े अशचर्यकर्म नहीं करता, उसकी करूणा सदा की है।

23उसने अपनी बुद्धि से आकाश बनाया, उसकी करूणा सदा की है।

24उसने पृथ्वी को जल के ऊपर फैलाया है, उसकी करूणा सदा की है।

25उसने बड़ी बड़ी ज्योतियों बनाईं, उसकी करूणा सदा की है।

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26दिन पर प्रभुता करने के लिये सूर्य को बनाया, उसकी करूणा सदा की है।

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