Lumina
Psalms

Not Unto Us

Psalms 115·Hindi Bible

1दुष्ट उसे देख कर कुढेगा; वह दांत पीस- पीसकर गल जाएगा; दुष्टों की लालसा पूरी न होगी॥

2याह की स्तुति करो हे यहोवा के दासों स्तुति करो, यहोवा के नाम की स्तुति करो!

3यहोवा का नाम अब से ले कर सर्वदा तक धन्य कहा जाय!

4उदयाचल से ले कर अस्ताचल तक, यहोवा का नाम स्तुति के योग्य है।

5यहोवा सारी जातियों के ऊपर महान है, और उसकी महिमा आकाश से भी ऊंची है॥

Psalms 115 illustration - Psalms Chapter 115

6हमारे परमेश्वर यहोवा के तुल्य कौन है? वह तो ऊंचे पर विराजमान है,

7और आकाश और पृथ्वी पर भी, दृष्टि करने के लिये झुकता है।

8वह कंगाल को मिट्टी पर से, और दरिद्र को घूरे पर से उठा कर ऊंचा करता है,

9कि उसको प्रधानों के संग, अर्थात अपनी प्रजा के प्रधानों के संग बैठाए।

10वह बांझ को घर में लड़कों की आनन्द करने वाली माता बनाता है। याह की स्तुति करो!

Psalms 115 illustration - Psalms Chapter 115

11जब इस्राएल ने मिस्त्र से, अर्थात याकूब के घराने ने अन्य भाषा वालों के बीच में कूच किया,

12तब यहूदा यहोवा का पवित्र स्थान और इस्राएल उसके राज्य के लोग हो गए॥

13समुद्र देखकर भागा, यर्दन नदी उलटी बही।

14पहाड़ मेढ़ों की नाईं उछलने लगे, और पहाड़ियां भेड़- बकरियों के बच्चों की नाईं उछलने लगीं॥

15हे समुद्र, तुझे क्या हुआ, कि तू भागा? और हे यर्दन तुझे क्या हुआ, कि तू उलटी बही?

Psalms 115 illustration - Psalms Chapter 115

16हे पहाड़ों तुम्हें क्या हुआ, कि तुम भेड़ों की नाईं, और हे पहाड़ियों तुम्हें क्या हुआ, कि तुम भेड़- बकरियों के बच्चों की नाईं उछलीं?

17हे पृथ्वी प्रभु के साम्हने, हां याकूब के परमेश्वर के साम्हने थरथरा।

18वह चट्टान को जल का ताल, चकमक के पत्थर को जल का सोता बना डालता है॥

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