1और लोग यहोवा के वचन की खोज में समुद्र से समुद्र तब और उत्तर से पूरब तक मारे मारे फिरेंगे, परन्तु उसको न पाएंगे॥
2उस समय सुन्दर कुमारियां और जवान पुरूष दोनों प्यास के मारे मूर्छा खाएंगे।
3जो लोग सामरिया के पाप मूल देवता की शपथ खाते हैं, और जो कहते हैं कि दान के देवता के जीवन की शपथ, और बेर्शेबा के पन्थ की शपथ, वे सब गिर पड़ेंगे, और फिर न उठेंगे॥
4मैं ने प्रभु को वेदी के ऊपर खड़ा देखा, और उसने कहा, खम्भे की कंगनियों पर मार जिस से डेवढिय़ां हिलें, और उन को सब लोगों के सिर पर गिरा कर टुकड़े टुकड़े कर; और जो नाश होने से बचें, उन्हें मैं तलवार से घात करूंगा; उन में से एक भी न भाग निकलेगा, और जो अपने को बचाए, वह बचने न पाएगा॥
5क्योंकि चाहे वे खोद कर अधोलोक में उतर जाएं, तो वहां से मैं हाथ बढ़ा कर उन्हें लाऊंगा; चाहे वे आकाश पर चढ़ जाएं, तो वहां से मैं उन्हें उतार लाऊंगा।

6चाहे वे कर्म्मेल में छिप जाएं, परन्तु वहां भी मैं उन्हें ढूंढ़-ढूंढकर पकड़ लूंगा, और चाहे वे समुद्र की थाह में मेरी दृष्टि से ओट हों, वहां भी मैं सर्प को उन्हें डसने की आज्ञा दूंगा।
7और चाहे शत्रु उन्हें हांक कर बंधुआई में ले जाएं, वहां भी मैं आज्ञा देकर तलवार से उन्हें घात कराऊंगा; और मैं उन पर भलाई करने के लिये नहीं, बुराई की करने के लिये दृष्टि करूंगा॥
8सेनाओं के परमेश्वर यहोवा के स्पर्श करने से पृथ्वी पिघलती है, और उसके सारे रहने वाले विलाप करते हैं; और वह सब की सब मिस्र की नदी के समान जो जाती है, जो बढ़ती है फिर लहरें मारती, और घट जाती है।
9जो आकाश में अपनी कोठरियां बनाता, और अपने आकाशमण्डल की नेव पृथ्वी पर डालता, और समुद्र का जल घरती पर बहा देता है, उसी का नाम यहोवा है॥
10हे इस्राएलियों, यहोवा की यह वाणी है, क्या तुम मेरे लेखे कूशियों के समान नहीं हो? क्या मैं इस्राएल को मिस्र देश से और पलिश्तियों को कप्तोर से नहीं निकाल लाया? और अरामियों को कीर से नहीं निकाल लाया?

11देखो, परमेश्वर यहोवा की दृष्टि इस पाप-मय राज्य पर लगी है, और मैं इस को धरती पर से नाश करूंगा; तौभी मैं पूरी रीति से याकूब के घराने को नाश न करूंगा, यहोवा की यही वाणी है।
12मेरी आज्ञा से इस्राएल का घराना सब जातियों में ऐसा चाला जाएगा जैसा अन्न चलनी में चाला जाता है, परन्तु उसका एक भी पुष्ट दाना भूमि पर न गिरेगा।
13मेरी प्रजा में के सब पापी जो कहते हैं कि वह विपत्ति हम पर न पड़ेगी, और न हमें घेरेगी, वे सब तलवार से मारे जाएंगे।
14उस समय मैं दाऊद की गिरी हुई झोंपड़ी को खड़ा करूंगा, और उसके बाड़े के नाकों को सुधारूंगा, और उसके खण्डहरों को फिर बनाऊंगा, और जैसा वह प्राचीनकाल से था, उसको वैसा ही बना दुंगा;
15जिस से वे बचे हुए एदोमियों को वरन सब अन्यजातियों को जो मेरी कहलाती है, अपने अधिकार में लें, यहोवा जो यह काम पूरा करता है, उसकी यही वाणी है॥

16यहोवा की यह भी वाणी है, देखो, ऐसे दिन आते हैं, कि हल जोतने वाला लवने वाले को और दाख रौंदने वाला बीच बोने वाले को जा लेगा; और पहाड़ों से नया दाखमधु टपकने लगेगा, और सब पहाडिय़ों से बह निकलेगा।
17मैं अपनी प्रजा इस्राएल के बंधुओं को फेर ले आऊंगा, और वे उजड़े हुए नगरों को सुधारकर उन में बसेंगे; वे दाख की बारियां लगा कर दाखमधु पीएंगे, और बगीचे लगा कर उनके फल खाएंगे।
18मैं उन्हें, उन्हीं की भूमि में बोऊंगा, और वे अपनी भूमि में से जो मैं ने उन्हें दी है, फिर कभी उखाड़े न जाएंगे, तुम्हारे परमेश्वर यहोवा का यही वचन है॥
19ओबद्याह का दर्शन॥ हम लोगों ने यहोवा की ओर से समाचार सुना है, और एक दूत अन्यजातियों में यह कहने को भेजा गया है:
20उठो! हम उस से लड़ने को उठें! मैं तुझे जातियों में छोटा कर दूंगा, तू बहुत तुच्छ गिना जाएगा।

21हे पहाड़ों की दरारों में बसने वाले, हे ऊंचे स्थान में रहने वाले, तेरे अभिमान ने तुझे धोखा दिया है; तू मन में कहता है,
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