1मैं बच्चे छीनी हुई रीछनी के समान बन कर उन को मिलूंगा, और उनके हृदय की झिल्ली को फाडूंगा, और सिंह की नाईं उन को वहीं खा डालूंगा, जैसे बन-पशु उन को फाड़ डाले॥
2हे इस्राएल, तेरे विनाश का कारण यह है, कि तू मेरा अर्थात अपने सहायक का विरोधी है।
3अब तेरा राजा कहां रहा कि तेरे सब नगरों में वह तुझे बचाए? और तेरे न्यायी कहां रहे, जिनके विषय में तू ने कहा था कि मेरे लिये राजा और हाकिम ठहरा दें?
4मैं ने क्रोध में आकर तेरे लिये राजा बनाए, और फिर जलजलाहट में आकर उन को हटा भी दिया।
5एप्रैम का अधर्म गठा हुआ है, उनका पाप संचय किया हुआ है।

6उसको जच्चा की सी पीड़ाए उठेंगी, परन्तु वह निर्बुद्धि लड़का है जो जन्म के समय ठीक से नहीं आता।
7मैं उसको अधोलोक के वश से छुड़ा लूंगा और मृत्यु से उसको छुटकारा दूंगा। हे मृत्यु, तेरी मारने की शक्ति कहां रही? हे अधोलोक, तेरी नाश करने की शक्ति कहां रहीं? मैं फिर कभी नहीं पछताऊंगा॥
8चाहे वह अपने भाइयों से अधिक फूले-फले, तौभी पुरवाई उस पर चलेगी, और यहोवा की ओर से मरूस्थल से आएगी, और उसका कुण्ड सूखेगा; और उसका सोता निर्जन हो जाएगा। उसकी रखी हुई सब मनभावनी वस्तुएं वह लूट ले जाएगा।
9सामरिया दोषी ठहरेगा, क्योंकि उसने अपने परमेश्वर से बलवा किया है; वे तलवार से मारे जाएंगे, उनके बच्चे पटके जाएंगे, और उनकी गर्भवती स्त्रियां चीर डालीं जाएंगी॥
10हे इस्राएल, अपने परमेश्वर यहोवा के पास लौट आ, क्योंकि तू ने अपने अधर्म के कारण ठोकर खाई है।

11बातें सीख कर और यहोवा की ओर फिर कर, उस से कह, सब अधर्म दूर कर; अनुग्रह से हम को ग्रहण कर; तब हम धन्यवाद रूपी बलि चढ़ाएंगे।
12अश्शूर हमारा उद्धार न करेगा, हम घोड़ों पर सवार न होंगे; और न हम फिर अपनी बनाई हुई वस्तुओं से कहेंगे, तुम हमारे ईश्वर हो; क्योंकि अनाथ पर तू ही दया करता है॥
13मैं उनकी भटक जाने की आदत को दूर करूंगा; मैं सेंतमेंत उन से प्रेम करूंगा, क्योंकि मेरा क्रोध उन पर से उतर गया है।
14मैं इस्राएल के लिये ओस के समान हूंगा; वह सोसन की नाईं फूले-फलेगा, और लबानोन की नाईं जड़ फैलाएगा।
15उसकी जड़ से पौधे फूटकर निकलेंगे; उसकी शोभा जलपाई की सी, और उसकी सुगन्ध लबानोन की सी होगी।

16जो उसकी छाया में बैठेंगे, वे अन्न की नाईं बढ़ेंगे, वे दाखलता की नाईं फूले-फलेंगे; और उसकी कीर्ति लबानोन के दाखमधु की सी होगी॥
17एप्रैम कहेगा, मूरतों से अब मेरा और क्या काम? मैं उसकी सुनकर उस पर दृष्टि बनाए रखूंगा। मैं हरे सनौवर सा हूं; मुझी से तू फल पाया करेगा॥
18जो बुद्धिमान हो, वही इन बातों को समझेगा; जो प्रवीण हो, वही इन्हें बूझ सकेगा; क्योंकि यहोवा के मार्ग सीधे हैं, और धर्मी उन में चलते रहेंगे, परन्तु अपराधी उन में ठोकर खाकर गिरेंगे॥
19यहोवा का वचन जो पतूएल के पुत्र योएल के पास पहुंचा, वह यह है:
20हे पुरनियो, सुनो, हे देश के सब रहने वालो, कान लगा कर सुनो! क्या ऐसी बात तुम्हारे दिनों में, वा तुम्हारे पुरखाओं के दिनों में कभी हुई है?
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