Lumina
Jeremiah

Siege of Jerusalem

Jeremiah 6·Hindi Bible

1इस कारण सेनाओं का परमेश्वर यहोवा यों कहता है, ये लोग जो ऐसा कहते हैं, इसलिये देख, मैं अपना वचन तेरे मुंह में आग, और इस प्रजा को काठ बनाऊंगा, और वह उन को भस्म करेगी।

2यहोवा की यह वाणी है, हे इस्राएल के घराने, देख, मैं तुम्हारे विरुद्ध दूर से ऐसी जाति को चढ़ा लाऊंगा जो सामथीं और प्राचीन है, उसकी भाषा तुम न समझोगे, और न यह जानोगे कि वे लोग क्या कह रहे हैं।

3उनका तर्कश खुली क़ब्र है और वे सब के सब शूरवीर हैं।

4तुम्हारे पक्के खेत और भोजनवस्तुएं जो तुम्हारे बेटे-बेटियों के खाने के लिये हैं उन्हें वे खा जाएंगे। वे तुम्हारी भेड़-बकरियों और गाय-बैलों को खा डालेंगे; वे तुम्हारी दाखों और अंजीरों को खा जाएंगे; और जिन गढ़ वाले नगरों पर तुम भरोसा रखते हो उन्हें वे तलवार के बल से नाश कर देंगे।

5तौभी, यहोवा की यह वाणी है, उन दिनों में भी मैं तुम्हारा अन्त न कर डालूंगा।

Jeremiah 6 illustration - Jeremiah Chapter 6

6और जब तुम पूछोगे कि हमारे परमेश्वर यहोवा ने हम से ये सब काम किस लिये किए हैं, तब तुम उन से कहना, जिस प्रकार से तुम ने मुझ को त्यागकर अपने देश में दूसरे देवताओं की सेवा की है, उसी प्रकार से तुम को पराये देश में परदेशियों की सेवा करनी पड़ेगी।

7याकूब के घराने में यह प्रचार करो, और यहूदा में यह सुनाओ:

8हे मूर्ख और निर्बुद्धि लोगो, तुम जो आंखें रहते हुए नहीं देखते, जो कान रहते हुए नहीं सुनते, यह सुनो।

9यहोवा की यह वाणी है, क्या तुम लोग मेरा भय नहीं मानते? क्या तुम मेरे सम्मुख नहीं थरथराते? मैं ने बालू को समुद्र का सिवाना ठहराकर युग युग का ऐसा बान्ध ठहराया कि वह उसे लांघ न सके; और चाहे उसकी लहरें भी उठें, तौभी वे प्रबल न हो सकें, था जब वे गरजें तौभी उसको न लांघ सकें।

10पर इस प्रजा का हठीला और बलवा करने वाला मन है; इन्होंने बलवा किया और दूर हो गए हैं।

Jeremiah 6 illustration - Jeremiah Chapter 6

11वे मन में इतना भी नहीं सोचते कि हमारा परमेश्वर यहोवा तो बरसात के आरम्भ और अन्त दोनों समयों का जल समय पर बरसाता है, और कटनी के नियत सप्ताहों को हमारे लिये रखता है, इसलिये हम उसका भय मानें।

12परन्तु तुम्हारे अधर्म के कामों ही के कारण वे रुक गए, और तुम्हारे पापों ही के कारण तुम्हारी भलाई नहीं होती।

13मेरी प्रजा में दुष्ट लोग पाए जाते हैं; जैसे चिड़ीमार ताक में रहते हैं, वैसे ही वे भी घात लगाए रहते हैं। वे फन्दा लगाकर मनुष्यों को अपने वश में कर लेते हैं।

14जैसा पिंजड़ा चिडिय़ों से भरा हो, वैसे ही उनके घर छल से भरे रहते हैं; इसी प्रकार वे बढ़ गए और धनी हो गए हैं।

15वे मोटे और चिकने हो गए हैं। बुरे कामों में वे सीमा को लांघ गए हैं; वे न्याय, विशेष कर के अनाथों का न्याय नहीं चुकाते; इस से उनका काम सफल नहीं होता: वे कंगालों का हक़ भी नहीं दिलाते।

Jeremiah 6 illustration - Jeremiah Chapter 6

16इसलिये, यहोवा की यह वाणी है, क्या मैं इन बातों का दण्ड न दूं? क्या मैं ऐसी जाति से पलटा न लूं?

17देश में ऐसा काम होता है जिस से चकित और रोमांचित होना चाहिये।

18भचिष्यद्वक्ता झूठमूठ भविष्यद्वाणी करते हैं; और याजक उनके सहारे से प्रभुता करते हैं; मेरी प्रजा को यह भाता भी है, परन्तु अन्त के समय तुम क्या करोगे?

19हे बिन्यामीनियो, यरूशलेम में से अपना अपना सामान ले कर भागो! तकोआ में नरसिंगा फूंको, और बेथक्केरेम पर झण्डा ऊंचा करो; क्योंकि उत्तर की दिशा से आने वाली विपत्ति बड़ी और विनाश लाने वाली है।

20सिय्योन की सुन्दर और सुकुमार बेटी को मैं नाश करने पर हूँ।

Jeremiah 6 illustration - Jeremiah Chapter 6

21चरवाहे अपनी अपनी भेड़-बकरियां संग लिए हुए उस पर चढ़ कर उसके चारों ओर अपने तम्बू खड़े करेंगे, वे अपने अपने पास की घास चरा लेंगे।

22आओ, उसके विरुद्ध युद्ध की तैयारी करो; उठो, हम दो पहर को चढ़ाई करें! हाय, हाय, दिन ढलता जाता है, और सांझ की परछाईं लम्बी हो चली है!

23उठो, हम रात ही रात चढ़ाई करें और उसके महलों को ढा दें।

24सेनाओं का यहोवा तुम से कहता है, वृक्ष काट काटकर यरूशलेम के विरुद्ध दमदमा बान्धो! यह वही नगर है जो दण्ड के योग्य है; इस में अन्धेर ही अनधेर भरा हुआ है।

25जैसा कूएं में से नित्य नया जल निकला करता है, वैसा ही इस नगर में से नित्य नई बुराई निकलती है; इस में उत्पात और उपद्रव का कोलाहल मचा रहता है; चोट और मारपीट मेरे देखने में निरन्तर आती है।

Jeremiah 6 illustration - Jeremiah Chapter 6

26हे यरूशलेम, ताड़ना से ही मान ले, नहीं तो तू मेरे मन से भी उतर जाएगी; और, मैं तुझ को उजाड़कर निर्जन कर डालूंगा।

27सेनाओं का यहोवा यों कहता है, इस्राएल के सब बचे हुए दाखलता की नाईं ढूंढ़ कर तोड़े जाएंगे; दाख के तोड़ने वाले की नाईं उस लता की डालियों पर फिर अपना हाथ लगा।

28मैं किस से बोलूं और किस को चिता कर कहूं कि वे मानें? देख, ये ऊंचा सुनते हैं, वे ध्यान भी नहीं दे सकते; देख, यहोवा के वचन की वे निन्दा करते और उसे नहीं चाहते हैं।

29इस कारण यहोवा का कोप मेरे मन में भर गया हे; मैं उसे रोकते रोकते उकता गया हूँ। बाज़ारों में बच्चों पर और जवानों की सभा में भी उसे उंडेल दे; क्योंकि पति अपनी पत्नी के साथ और अधेड़ बूढ़े के साथ पकड़ा जाएगा।

30उन लोगों के घर और खेत और स्त्रियां सब औरों को हो जाएंगीं; क्योंकि मैं इस देश के रहने वालों पर हाथ बढ़ाऊंगा, यहोवा की यही वाणी है।

Chapter Complete

You have read Jeremiah 6

30 verses