1सब धनुर्धारियों को बाबुल के विरुद्ध इकट्ठे करो, उसके चारों ओर छावनी डालो, कोई जन भाग कर निकलने न पाए। उसके काम का बदला उसे देओ, जैसा उसने किया है, ठीक वैसा ही उसके साथ करो; क्योंकि उसने यहोवा इस्राएल के पवित्र के विरुद्ध अभिमान किया है।
2इस कारण उसके जवान चौकों में गिराए जाएंगे, और सब योद्धाओं का बोल बन्द हो जाएगा, यहोवा की यही वाणी है।
3प्रभु सेनाओं के यहोवा की यह वाणी है, हे अभिमानी, मैं तेरे विरुद्ध हूँ; तेरे दण्ड पाने का दिन आ गया है।
4अभिमानी ठोकर खाकर गिरेगा ओर कोई उसे फिर न उठाएगा; और मैं उसके नगरों में आग लगाऊंगा जिस से उसके चारों ओर सब कुछ भस्म हो जाएगा।
5सेनाओं का यहोवा यों कहता है, इस्राएल और यहूदा दोनों बराबर पिसे हुए हैं; और जितनों ने उन को बंधुआ किया वे उन्हें पकड़े रहते हैं, और जाने नहीं देते।

6उनका छुड़ाने वाला सामथीं है; सेनाओं का यहोवा, यही उसका नाम है। वह उनका मुक़द्दमा भली भांति लड़ेगा कि पृथ्वी को चैन दे परन्तु बाबुल के निवासियों व्याकुल करे।
7यहोवा की यह वाणी है, कसदियों और बाबुल के हाकिम, पण्डित आदि सब निवासियों पर तलवार चलेगी!
8बड़ा बोल बोलने वालों पर तलवार चलेगी, और वे मूर्ख बनेंगे! उसके शूरवीरों पर भी तलवार चलेगी, और वे विस्मित हो जाएंगे!
9उसके सवारों और रथियों पर और सब मिले जुले लोगों पर भी तलवार चलेगी, और वे स्त्रियें बन जाएंगे! उसके भण्ड़ारों पर तलवार चलेगी, और वे लुट जाएंगे!
10उसके जलाशयों पर सूखा पड़ेगा, और वे सूख जाएंगे! क्योंकि वह खुदी हुई मूरतों से भरा हुआ देश है, और वे अपनी भयानक प्रतिमाओं पर बावले हैं।

11इसलिये निर्जल देश के जन्तु सियारों के संग मिल कर वहां बसेंगे, और शुतुर्मुर्ग उस में वास करेंगे, और वह फिर सदा तक बसाया न जाएगा, न युग युग उस में कोई वास कर सकेगा।
12यहोवा की यह वाणी है, कि सदोम और अमोरा और उनके आस पास के नगरों की जैसी दशा उस समय हुई थी जब परमेश्वर ने उन को उलट दिया था, वैसी ही दशा बाबुल की भी होगी, यहां तक कि कोई मनुष्य उस में न रह सकेगा, और न कोई आदमी उस में टिकेगा।
13सुनो, उत्तर दिशा से एक देश के लोग आते हैं, और पृथ्वी की छोर से एक बड़ी जाति और बहुत से राजा उठ कर चढ़ाई करेंगे।
14वे धनुष और बर्छी पकड़े हुए हैं; वे क्रूर और निर्दय हैं; वे समुद्र की नाईं गरजेंगे; और घोड़ों पर चढ़े हुए तुझ बाबुल की बेटी के विरुद्ध पांति बान्धे हुए युद्ध करने वालों की नाईं आएंगे।
15उनका समाचार सुनते ही बाबुल के राजा के हाथ पांव ढीले पड़ गए, और उसको ज़च्चा की सी पीड़ें उठीं।

16सुनो, वह सिंह की नाईं आएगा जो यरदन के आस पास के घने जंगल से निकल कर दृढ़ भेड़शाले पर चढ़े, परन्तु मैं उन को उसके साम्हने से झट भगा दूंगा; तब जिस को मैं चुन लूं, उसी को उन पर अधिकारी ठहराऊंगा। देखो, मेरे तुल्य कौन हे? कौन मुझ पर मुक़द्दमा चलाएगा? वह चरवाहा कहां है जो मेरा साम्हना कर सकेगा?
17सो सुनो कि यहोवा ने बाबुल के विरुद्ध क्या युक्ति की है और कसदियों के देश के विरुद्ध कौन सी कल्पना की है: निश्चय वह भेड़-बकरियों के बच्चों को घसीट ले जाएगा, निश्चय वह उनकी चराइयों को भेड़-बकरियों से खाली कर देगा।
18बाबुल के लूट लिए जाने के शब्द से पृथ्वी कांप उठी है, और उसकी चिल्लाहट जातियों में सुनाई पड़ती है।
19यहोवा यों कहता है, मैं बाबुल के और लेबकामै के रहने वालों के विरुद्ध एक नाश करने वाली वायु चलाऊंगा;
20और मैं बाबुल के पास ऐसे लोगों को भेजूंगा जो उसको फटक-फटककर उड़ा देंगे, और इस रीति उसके देश को सुनसान करेंगे; और विपत्ति के दिन चारों ओर से उसके विरुद्ध होंगे।

21धनुर्धारी के विरुद्ध और जो अपना झिलम पहिने हैं धनुर्धारी धनुष चढ़ाए हुए उठे; उसके जवानों से कुछ कोमलता न करना; उसकी सारी सेना को सत्यानाश करो।
22कसदियों के देश में मरे हुए और उसकी सड़कों में छिदे हुए लोग गिरेंगे।
23क्योंकि, यद्यपि इस्राएल और यहूदा के देश, इस्राएल के पवित्र के विरुद्ध किए हुए पापों से भरपूर हो गए हैं, तौभी उनके परमेश्वर, सेनाओं के यहोवा ने उन को त्याग नहीं दिया।
24बाबुल में से भागो, अपना अपना प्राण बचाओ! उसके अधर्म में भागी हो कर तुम भी न मिट जाओ; क्योंकि यह यहोवा के बदला लेने का समय है, वह उसको बदला देने पर है।
25बाबुल यहोवा के हाथ में सोने का कटोरा था, जिस से सारी पृथ्वी के लोग मतवाले होते थे; जाति जाति के लोगों ने उसके दाखमधु में से पिया, इस कारण वे भी बावले हो गए।

26बाबुल अचानक ले ली गई और नाश की गई है। उसके लिये हाय-हाय करो! उसके घावों के लिये बलसान औषधि लाओ; सम्भव है वह चंगी हो सके।
27हम बाबुल का इलाज करते तो थे, परन्तु वह चंगी नहीं हुई। सो आओ, हम उसको तजकर अपने अपने देश को चले जाएं; क्योंकि उस पर किए हुए न्याय का निर्णय आकाश वरन स्वर्ग तक भी पहुंच गया है।
28यहोवा ने हमारे धर्म के काम प्रगट किए हैं; सो आओ, हम सिय्योन में अपने परमेश्वर यहोवा के काम का वर्णन करें।
29तीरों को पैना करो! ढालें थामे रहो! क्योंकि यहोवा ने मादी राजाओं के मन को उभारा है, उसने बाबुल को नाश करने की कल्पना की है, क्योंकि यहोवा अर्थात उसके मन्दिर का यही बदला है
30बाबुल की शहरपनाह के विरुद्ध झण्डा खड़ा करो; बहुत पहरुए बैठाओ; घात लगाने वालों को बैठाओ; क्योंकि यहोवा ने बाबुल के रहने वालों के विरुद्ध जो कुछ कहा था, वह अब करने पर है वरन किया भी है।

31हे बहुत जलाशयों के बीच बसी हुई और बहुत भण्डार रखने वाली, तेरा अन्त आ गया, तेरे लोभ की सीमा पहुंच गई है।
32सेनाओं के यहोवा ने अपनी ही शपथ खाई है, कि निश्चय मैं तुझ को टिड्डियों के समान अनगिनित मनुष्यों से भर दूंगा, और वे तेरे विरुद्ध ललकारेंगे।
33उसी ने पृथ्वी को अपने सामर्थ से बनाया, और जगत को अपनी बुद्धि से स्थिर किया; और आकाश को अपनी प्रवीणता से तान दिया है।
34जब वह बोलता है तब आकाश में जल का बड़ा शब्द होता है, वह पृथ्वी की छोर से कुहरा उठाता है। वह वर्षा के लिये बिजली बनाता, और अपने भण्डार में से पवन निकाल ले आता है।
35सब मनुष्य पशु सरीखे ज्ञानरहित है; सब सोनारों को अपनी खोदी हुई मूरतों के कारण लज्जित होना पड़ेगा; क्योंकि उनकी ढाली हुई मूरतें धोखा देने वाली हैं, और उनके कुछ भी सांस नहीं चलती।

36वे तो व्यर्थ और ठट्ठे ही के योग्य है; जब उनके नाश किए जाने का समय आएगा, तब वे नाश ही होंगी।
37परन्तु जो याकूब का निज भाग है, वह उनके समान नहीं, वह तो सब का बनाने वाला है, और इस्राएल उसका निज भाग है; उसका नाम सेनाओं का यहोवा है।
38तू मेरा फरसा और युद्ध के लिये हथियार ठहराया गया है; तेरे द्वारा मैं जाति जाति को तितर-बितर करूंगा; और तेरे ही द्वारा राज्य राज्य को नाश करूंगा।
39तेरे ही द्वारा मैं सवार समेत घोड़ों को टुकड़े टुकड़े करूंगा;
40तेरे ही द्वारा रथी समेत रथ को भी टुकड़े टुकड़े करूंगा; तेरे ही द्वारा मैं स्त्री पुरुष दोनों को टुकड़े टुकड़े करूंगा; तेरे ही द्वारा मैं बूढ़े और लड़के दोनों को टुकढ़े टुकड़े करूंगा, और जवान पुरुष और जवान स्त्री दोनों को मैं तेरे ही द्वारा टुकड़े टुकड़े करूंगा;

41तेरे ही द्वारा मैं भेड़-बकरियों समेत चरवाहे को टुकड़े टुकड़े करूंगा; तेरे ही द्वारा मैं किसान और उसके जोड़े बैलों को भी टुकड़े टुकड़े करूंगा; अधिपतियों और हाकिमों को भी मैं तेरे ही द्वारा टुकड़े टुकड़े करूंगा।
42मैं बाबुल को और सारे कसदियों को भी उन सब बुराइयों का बदला दूंगा, जो उन्होंने तुम लोगों के साम्हने सिय्योन में की है; यहोवा की यही वाणी है।
43हे नाश करने वाले पहाड़ जिसके द्वारा सारी पृथ्वी नाश हुई है, यहोवा की यह वाणी है कि मैं तेरे विरुद्ध हूँ और हाथ बढ़ा कर तुझे ढांगों पर से लुढ़का दूंगा और जला हुआ पहाड़ बनाऊंगा।
44लोग तुझ से न तो घर के कोने के लिये पत्थर लेंगे, और न नेव के लिये, क्योंकि तू सदा उजाड़ रहेगा, यहोवा की यही वाणी है।
45देश में झण्डा खड़ा करो, जाति जाति में नरसिंगा फूंको ; उसके विरुद्ध जाति जाति को तैयार करो; अरारात, मिन्नी और अश्कनज नाम राज्यों को उसके विरुद्ध बुलाओ, उसके विरुद्ध सेनापति भी ठहराओ; घोड़ों को शिखर वाली टिड्डियों के समान अनगिनित चढ़ा ले आओ।

46उसके विरुद्ध जातियों को तैयार करो; मादी राजाओं को उनके अधिपतियों सब हाकिमों सहित और उस राज्य के सारे देश को तैयार करो।
47यहोवा ने विचारा है कि वह बाबुल के देश को ऐसा उजाड़ करे कि उस में कोई भी न रहे; इसलिये पृथ्वी कांपती है और दु:खित होती है
48बाबुल के शूरवीर गढ़ों में रहकर लड़ने से इनकार करते हैं, उनकी वीरता जाती रही है; और यह देख कर कि उनके वासस्थानों में आग लग गई वे स्त्री बन गए हैं; उसके फाटकों के बेण्डे तोड़े गए हैं।
49एक हरकारा दूसरे हरकारे से और एक समाचार देने वाला दूसरे समाचार देने वाले से मिलने और बाबुल के राजा को यह समाचार देने के लिये दौड़ेगा कि तेरा नगर चारों ओर से ले लिया गया है;
50और घाट शत्रुओं के वश में हो गए हैं, ताल भी सुखाये गए, ओर योद्धा घबरा उठे हैं।

51क्योंकि इस्राएल का परमेश्वर, सेनाओं का यहोवा यों कहता है: बाबुल की बेटी दांवते समय के खलिहान के समान है, थोड़े ही दिनों में उसकी कटनी का समय आएगा।
52बाबुल के राजा नबूकदनेस्सर ने मुझ को खा लिया, मुझ को पीस डाला; उसने मुझे छूछे बर्तन के समान कर दिया, उसने मगरमच्छ की नाईं मुझ को निगल लिया है; और मुझ को स्वादिष्ट भोजन जान कर अपना पेट मुझ से भर लिया है, उसने मुझ को बरबस निकाल दिया हे।
53सिय्योन की रहने वाली कहेगी, कि जो उपद्रव मुझ पर और मेरे शरीर पर हुआ है, वह बाबुल पर पलट जाए। और यरूशलेम कहेगी कि मुझ में की हुई हत्याओं का दोष कसदियों के देश के रहने वालों पर लगे।
54इसलिये यहोवा कहता है, मैं तेरा मुक़द्दमा लड़ूंगा और तेरा बदला लूंगा। मैं उसके ताल को और उसके सोतों को सुखा दूंगा;
55और बाबुल खण्डहर, और गीदड़ों का वासस्थान होगा; और लोग उसे देख कर चकित होंगे और ताली बजाएंगे, और उस में कोई न रहेगा।

56लोग एक संग ऐसे गरजेंगे और गुर्राएंगे, जैसे युवा सिंह व सिंह के बच्चे आहेर पर करते हैं।
57परन्तु जब जब वे उत्तेजित हों, तब मैं जेवनार तैयार कर के उन्हें ऐसा मतवाला करूंगा, कि वे हुलसकर सदा की नींद में पड़ेंगे और कभी न जागेंगे, यहोवा की यही वाणी है।
58मैं उन को, भेड़ों के बच्चों, और मेढ़ों और बकरों की नाईं घात करा दूंगा।
59शेशक, जिसकी प्रशंसा सारे पृथ्वी पर होती थी कैसे ले लिया गया? वह कैसे पकड़ा गया? बाबुल जातियों के बीच कैसे सुनसान हो गया है?
60बाबुल के ऊपर समुद्र चढ़ आया है, वह उसकी बहुत सी लहरों में डूब गया है।

61उसके नगर उजड़ गए, उसका देश निर्जन और निर्जल हो गया है, उस में कोई मनुष्य नहीं रहता, और उस से हो कर कोई आदमी नहीं चलता।
62मैं बाबुल में बेल को दण्ड दूंगा, और उसने जो कुछ निगल लिया है, वह उसके मुंह से उगलवाऊंगा। जातियों के लोग फिर उसकी ओर तांता बान्धे हुए न चलेंगे; बाबुल की शहरपनाह गिराई जाएगी।
63हे मेरी प्रजा, उस में से निकल आओ! अपने अपने प्राण को यहोवा के भड़के हुए कोप से बचाओ!
64जब उड़ती हुई बात उस देश में सुनी जाए, तब तुम्हारा मन न घबराए; और जो उड़ती हुई चर्चा पृथ्वी पर सुनी जाएगी तुम उस से न डरना: उसके एक वर्ष बाद एक और बात उड़ती हुई आएगी, तब उसके बाद दूसरे वर्ष में एक और बात उड़ती हुई आएगी, और उस देश में उपद्रव होगा, और एक हाकिम दूसरे के विरुद्ध होगा।
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