1तब उसने उन पर कसदियों के राजा से चढ़ाई करवाई, और इस ने उनके जवानों को उनके पवित्र भवन ही में तलवार से मार डाला। और क्या जवान, क्या कुंवारी, क्या बूढ़े, क्या पक्के बाल वाले, किसी पर भी कोमलता न की; यहोवा ने सभों को उसके हाथ में कर दिया।
2और क्या छोटे, क्या बड़े, परमेश्वर के भवन के सब पात्र और यहोवा के भवन, और राजा, और उसके हाकिमों के खजाने, इन सभों को वह बाबेल में ले गया।
3और कसदियो ने परमेश्वर का भवन फूंक दिया, और यरूशलेम की शहरपनाह को तोड़ ड़ाला, और आग लगा कर उसके सब भवनों को जलाया, और उस में का सारा बहुमूल्य सामान नष्ट कर दिया।
4और जो तलवार से बच गए, उन्हें वह बाबेल को ले गया, और फारस के राज्य के प्रबल होने तक वे उसके और उसके बेटों-पोतों के आधीन रहे।
5यह सब इसलिये हुआ कि यहोवा का जो वचन यिर्मयाह के मुंह से निकला था, वह पूरा हो, कि देश अपने विश्राम कालों में सुख भोगता रहे। इसलिये जब तक वह सूना पड़ा रहा तब तक अर्थात सत्तर वर्ष के पूरे होने तक उसको विश्राम मिला।

6फारस के राजा कूस्रू के पहिले वर्ष में यहोवा ने उसके मन को उभारा कि जो वचन यिर्मयाह के मुंह से निकला था, वह पूरा हो। इसलिये उसने अपने समस्त राज्य में यह प्रचार करवाया, और इस आशय की चिट्ठियां लिखवाईं,
7कि फारस का राजा कू्स्रू कहता है, कि स्वर्ग के परमेश्वर यहोवा ने पृथ्वी भर का राज्य मुझे दिया है, और उसी ने मुझे आज्ञा दी है कि यरूशलेम जो यहूदा में है उस में मेरा एक भवन बनवा; इसलिये हे उसकी प्रजा के सब लोगो, तुम में से जो कोई चाहे कि उसका परमेश्वर यहोवा उसके साथ रहे, तो वह वहां रवाना हो जाए।
8फारस के राजा कुस्रू के पहिले वर्ष में यहोवा ने फारस के राजा कुस्रू का मन उभारा कि यहोवा का जो वचन यिर्मयाह के मुंह से निकला था वह पूरा हो जाए, इसलिये उसने अपने समस्त राज्य में यह प्रचार करवाया और लिखवा भी दिया:
9कि फारस का राजा कुस्रू यों कहता है: कि स्वर्ग के परमेश्वर यहोवा ने पृथ्वी भर का राज्य मुझे दिया है, और उसने मुझे आज्ञा दी, कि यहूदा के यरूशलेम में मेरा एक भवन बनवा।
10उसकी समस्त प्रजा के लोगों में से तुम्हारे मध्य जो कोई हो, उसका परमेश्वर उसके साथ रहे, और वह यहूदा के यरूशलेम को जा कर इस्राएल के परमेश्वर यहोवा का भवन बनाए - जो यरूशलेम में है वही परमेश्वर है।

11और जो कोई किसी स्थान में रह गया हो, जहां वह रहता हो, उस स्थान के मनुष्य चान्दी, सोना, धन और पशु दे कर उसकी सहायता करें और इस से अधिक परमेश्वर के यरूशलेम के भवन के लिये अपनी अपनी इच्छा से भी भेंट चढ़ाएं॥
12तब यहूदा और बिन्यामीन के जितने पितरों के घरानों के मुख्य पुरूषों और याजकों और लेवियों का मन परमेश्वर ने उभारा था कि जा कर यरूशलेम में यहोवा के भवन को बनाएं, वे सब उठ खड़े हुए;
13और उनके आसपास सब रहने वालों ने चान्दी के पात्र, सोना, धन, पशु और अनमोल वस्तुएं देकर, उनकी सहायता की; यह उन सब से अधिक था, जो लोगों ने अपनी अपनी इच्छा से दिया।
14फिर यहोवा ने भवन के जो पात्र नबूकदनेस्सर ने यरूशलेम से निकाल कर अपने देवता के भवन में रखे थे,
15उन को कुस्रू राजा ने, मिथूदात खजांची से निकलवा कर, यहूदियों के शेशबस्सर नाम प्रधान को गिन कर सौंप दिया।

16उनकी गिनती यह थी, अर्थात सोने के तीस और चान्दी के एक हजार परात और उनतीस छुरी,
17सोने के तीस और मघ्यम प्रकार के चान्दी के चार सौ दस कटोरे तथा और प्रकार के पात्र एक हजार।
18सोने चान्दी के पात्र सब मिल कर पांच हजार चार सौ थे। इन सभों को शेशबस्सर उस समय ले आया जब बन्धुए बाबेल से यरूशलेम को आए॥
19जिन को बाबेल का राजा नबूकदनेस्सर बाबेल को बन्धुआ कर के ले गया था, उन में से प्रान्त के जो लोग बन्धुआई से छूट कर यरूशलेम और यहूदा को अपने अपने नगर में लौटे वे ये हैं।
20ये जरूब्बाबेल, येशू, नहेम्याह, सरायाह, रेलायाह, मौर्दकै, बिलशान, मिस्पार, बिगवै, रहूम और बाना के साथ आए। इस्राएली प्रजा के मनुष्यों की गिनती यह है, अर्थात

21परोश की सन्तान दो हजार एक सौ बहत्तर,
22शपत्याह की सन्तान तीन सौ बहत्तर,
23आरह की सन्तान सात सौ पछहत्तर,
24पहत्मोआब की सन्तान येशू और योआब की सन्तान में से दो हजार आठ सौ बारह,
25एलाम की सन्तान बारह सौ चौवन,

26जत्तू की सन्तान नौ सौ पैंतालीस,
27जक्कै की सन्तान सात सौ साठ,
28बानी की सन्तान छ: सौ बयालीस
29बेबै की सन्तान छ: सौ तेईस,
30अजगाद की सन्तान बारह सौ बाईस,

31अदोनीकाम की सन्तान छ: सौ छियासठ,
32बिग्वै की सन्तान दो हजार छप्पन,
33आदीन की सन्तान चार सौ चौवन,
34यहिजकिय्याह की सन्तान आतेर की सन्तान में से अट्ठानवे,
35बेसै की सन्तान तीन सौ तेईस,

36योरा के लोग एक सौ बारह,
37हाशूम के लोग दो सौ तेईस,
38गिब्बार के लोग पंचानवे,
39बेतलेहेम के लोग एक सौ तेईस,
40नतोपा के मनुष्य छप्पन;

41अनातोत के मनुष्य एक सौ अट्ठाईस,
42अज्मावेत के लोग बयालीस,
43किर्यतारीम कपीरा और बेरोत के लोग सात सौ तैतालीस,
44रामा और गेबा के लोग छ: सौ इक्कीस,
45मिकमास के मनुष्य एक सौ बाईस,

46बेतेल और ऐ के मनुष्य दो सौ तेईस,
47नबो के लोग बावन,
48मग्बीस की सन्तान एक सौ छप्पन,
49दूसरे एलाम की सन्तान बारह सौ चौवन,
50हारीम की सन्तान तीन सौ बीस,

51लोद, हादीद और ओनो के लोग सात सौ पच्चीस,
52यरीहो के लोग तीन सौ पैंतालीस,
53सना के लोग तीन हजार छ: सौ तीस॥
54फिर याजकों अर्थात येशू के घराने में से यदायाह की सन्तान नौ सौ तिहत्तर,
55इम्मेर की सन्तान एक हजार बावन,

56पशहूर की सन्तान बारह सौ सैंतालीस,
57हारीम की सन्तान एक हजार सतरह।
58फिर लेवीय, अर्थात येशू की सन्तान और कदमिएल की सन्तान होदब्याह की सन्तान में से चौहत्तर।
59फिर गवैयों में से आसाप की सन्तान एक सौ अट्ठाईस।
60फिर दरबानों की सन्तान, शल्लूम की सन्तान, आतेर की सन्तान, तल्मोन की सन्तान, अक्कूब की सन्तान, हतीता की सन्तान, और शोबै की सन्तान, ये सब मिल कर एक सौ उनतालीस हुए।

61फिर नतीन की सन्तान, सीहा की सन्तान, हसूपा की सन्तान, तब्बाओत की सन्तान।
62केरोस की सन्तान, सीअहा की सन्तान, पादोन की सन्तान,
63लवाना की सन्तान, हगबा की सन्तान, अक्कूब की सन्तान,
64हागाब की सन्तान, शमलै की सन्तान, हानान की सन्तान,
65गिद्दल की सन्तान, गहर की सन्तान, रायाह की सन्तान,

66रसीन की सन्तान, नकोदा की सन्तान, गज्जाम की सन्तान,
67उज्जा की सन्तान, पासेह की सन्तान, बेसै की सन्तान,
68अस्ना की सन्तान, मूनीम की सन्तान, नपीसीम की सन्तान,
69बकबूक की सन्तान, हकूपा की सन्तान, हर्हूर की सन्तान।
70बसलूत की सन्तान, महीदा की सन्तान, हर्शा की सन्तान,
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70 verses