Lumina
Ezekiel

River from the Temple

Ezekiel 47·Hindi Bible

1और बछड़े और मेढ़े दोनों के साथ वह एक एक एपा अन्नबलि तैयार करे, और भेड़ के बच्चों के साथ यथाशक्ति अन्न, और एपा पीछे हीन भर तेल।

2और जब प्रधान भीतर जाए तब वह फाटक के ओसारे से हो कर जाए, और उसी मार्ग से निकल जाए।

3जब साधारण लोग नियत समयों में यहोवा के साम्हने दण्डवत करने आएं, तब जो उत्तरी फाटक से हो कर दण्डवत करने को भीतर आए, वह दक्खिनी फाटक से हो कर निकले, और जो दक्खिनी फाटक से हो कर भीतर आए, वह उत्तरी फाटक से हो कर निकले, अर्थात जो जिस फाटक से भीतर आया हो, वह उसी फाटक से न लौटे, अपने साम्हने ही निकल जाए।

4और जब वे भीतर आएं तब प्रधान उनके बीच हो कर आएं, और जब वे निकलें, तब वे एक साथ निकलें।

5और पर्वों और अन्य नियत समयों का अन्नबलि बछड़े पीछे एपा भर, और मेढ़े पीछे एपा भर का हो; और भेड़ के बच्चों के साथ यथाशक्ति अन्न और एपा पीछे हीन भर तेल।

Ezekiel 47 illustration - Ezekiel Chapter 47

6फिर जब प्रधान होमबलि वा मेलबलि को स्वेच्छा बलि कर के यहोवा के लिये तैयार करे, तब पूर्वमुखी फाटक उनके लिये खोला जाए, और वह अपना होमबलि वा मेलबलि वैसे ही तैयार करे जैसे वह विश्राम दिन को करता है; तब वह निकले, और उसके निकलने के पीछे फाटक बन्द किया जाए।

7और प्रति दिन तू वर्ष भर का एक निर्दोष भेड़ का बच्चा यहोवा के होमबलि के लिये तैयार करना, यह प्रति भोर को तैयार किया जाए।

8और प्रति भोर को उसके साथ एक अन्नबलि तैयार करना, अर्थात एपा का छठवां अंश और मैदा में मिलाने के लिये हीन भर तेल की तिहाई यहोवा के लिये सदा का अन्नबलि नित्य विधि के अनुसार चढ़ाया जाए।

9भेड़ का बच्चा, अन्नबलि और तेल, प्रति भोर को नित्य होमबलि कर के चढ़ाया जाए।

10परमेश्वर यहोवा यों कहता है, यदि प्रधान अपने किसी पुत्र को कुछ दे, तो वह उसका भाग हो कर उसके पोतों को भी मिले; भाग के नियम के अनुसार वह उनका भी निज धन ठहरे।

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11परन्तु यदि वह अपने भाग में से अपने किसी कर्मचारी को कुछ दे, तो छुट्टी के वर्ष तक तो वह उसका बना रहे, परन्तु उसके बाद प्रधान को लैटा दिया जाए; और उसका निज भाग ही उसके पुत्रों को मिले।

12और प्रजा का ऐसा कोई भाग प्रधान न ले, जो अन्धेर से उनकी निज भूमि से छीना हो; अपने पुत्रों को वह अपनी ही निज भूमि में से भाग दे; ऐसा न हो कि मेरी प्रजा के लोग अपनी अपनी निज भूमि से तितर-बितर हो जाएं।

13फिर वह मुझे फाटक की एक अलंग में द्वार से हो कर याजकों की उत्तरमुखी पवित्र कोठरियों में ले गया; वहां पश्चिम ओर के कोने में एक स्थान था।

14तब उसने मुझ से कहा, यह वह स्थान है जिस में याजक लोग दोषबलि और पापबलि के मांस को पकाएं और अन्नबलि को पकाएं, ऐसा न हो कि उन्हें बाहरी आंगन में ले जाने से साधारण लोग पवित्र ठहरें।

15तब उसने मुझे बाहरी आंगन में ले जा कर उस आंगन के चारों कोनों में फिराया, और आंगन के हर एक कोने में एक एक ओट बना था,

Ezekiel 47 illustration - Ezekiel Chapter 47

16अर्थात आंगन के चारों कोनों में चालीस हाथ लम्बे और तीस हाथ चौड़े ओट थे; चारों कोनों के ओटों की एक ही माप थी।

17और भीतर चारों ओर भीत थी, और भीतों के नीचे पकाने के चूल्हे बने हुए थे।

18तब उसने मुझ से कहा, पकाने के घर, जहां भवन के टहलुए लोगों के बलिदानों को पकाएं, वे ये ही हैं।

19फिर वह मुझे भवन के द्वार पर लौटा ले गया; और भवन की डेवढ़ी के नीचे से एक सोता निकलकर पूर्व ओर बह रहा था। भवन का द्वार तो पूर्वमुखी था, और सोता भवन के पूर्व और वेदी के दक्खिन, नीचे से निकलता था।

20तब वह मुझे उत्तर के फाटक से हो कर बाहर ले गया, और बाहर बाहर से घुमाकर बाहरी अर्थात पूर्वमुखी फाटक के पास पहुंचा दिया; और दक्खिनी अलंग से जल पसीजकर बह रहा था।

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21जब वह पुरुष हाथ में माप ने की डोरी लिए हुए पूर्व ओर निकला, तब उसने भवन से ले कर, हजार हाथ तक उस सोते को मापा, और मुझे जल में से चलाया, और जल टखनों तक था।

22उसने फिर हजार हाथ माप कर मुझे जल में से चलाया, और जल घुटनों तक था, फिर ओर हजार हाथ माप कर मुझे जल में से चलाया, और जल कमर तक था।

23तब फिर उसने एक हजार हाथ मापे, और ऐसी नदी हो गई जिसके पार मैं न जा सका, क्योंकि जल बढ़ कर तैरने के योग्य था; अर्थात ऐसी नदी थी जिसके पार कोई न जा सकता था।

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