1उस में सेवा का जितना काम हो, और जो कुछ उस में करना हो, उसके करने वाले वे ही हों
2फिर लेवीय याजक जो सादोक की सन्तान हैं, और जिन्होंने उस समय मेरे पवित्र स्थान की रक्षा की जब इस्राएली मेरे पास से भटक गए थे, वे मेरी सेवा टहल करने को मेरे समीप आया करें, और मुझे चर्बी और लोहू चढ़ाने को मेरे सम्मुख खड़े हुआ करें, परमेश्वर यहोवा की यही वाणी है।
3वे मेरे पवित्र स्थान में आया करें, और मेरी मेज़ के पास मेरी सेवा टहल करने को आएं और मेरी वस्तुओं की रक्षा करें।
4और जब वे भीतरी आंगन के फाटकों से हो कर जाया करें, तब सन के वस्त्र पहिने हुए जाएं, और जब वे भीतरी आंगन के फाटकों में वा उसके भीतर सेवा टहल करते हों, तब कुछ ऊन के वस्त्र न पहिनें।
5वे सिर पर सन की सुन्दर टोपियां पहिनें और कमर में सन की जांघिया बान्धें हों; किसी ऐसे कपड़े से वे कमर न बांधें जिस से पसीना होता है।

6और जब वे बाहरी आंगन में लोगों के पास निकलें, तब जो वस्त्र पहिने हुए वे सेवा टहल करते थे, उन्हें उतार कर और पवित्र कोठरियों में रख कर दूसरे वस्त्र पहिनें, जिस से लोग उनके वस्त्रों के कारण पवित्र न ठहरें।
7और न तो वे सिर मुण्डाएं, और न बाल लम्बे होने दें; वे केवल अपने बाल कटाएं।
8और भीतरी आंगन में जाने के समय कोई याजक दाखमधु न पीए।
9वे विधवा वा छोड़ी हुई सत्री को ब्याह न लें; केवल इस्राएल के घराने के पंश में से कुंवारी वा ऐसी विधवा बयाह लें जो किसी याजक की स्त्री हुई हो।
10वे मेरी प्रजा को पवित्र अपवित्र का भेद सिखाया करें, और शुद्ध अशुद्ध का अन्तर बताया करें।

11और जब कोई मुक़द्दमा हो तब न्याय करने को भी वे ही बैठें, और मेरे नियमों के अनुसार न्याय करें। मेरे सब नियत पर्वों के विषय भी वे मेरी व्यवस्था और विधियां पालन करें, और मेरे विश्राम दिनों को पवित्र मानें।
12वे किसी मनुष्य की लोथ के पास न जाएं कि अशुद्ध हो जाएं; केवल माता-पिता, बेटे-बेटी; भाई, और ऐसी बहिन की लोथ के कारण जिसका विवाह न हुआ हो वे अपने को अशुद्ध कर सकते हैं।
13और जब वे अशुद्ध हो जाएं, तब उनके लिये सात दिन गिने जाएं और तब वे शुद्ध ठहरें,
14और जिस दिन वे पवित्रस्थान अर्थात भीतरी आंगन में सेवा टहल करने को फिर प्रवेश करें, उस दिन अपने लिये पापबलि चढ़ाएं, परमेश्वर यहोवा की यही वाणी हे।
15और उनका एक ही निज भाग होगा, अर्थात उनका भाग मैं ही हूँ; तुम उन्हें इस्राएल के बीच कुछ ऐसी भूमि न देना जो उनकी निज हो; उनकी निज भूमि मैं ही हूँ।

16वे अन्नबलि, पापबलि और दोषबलि खाया करें; और इस्राएल में जो वस्तु अर्पण की जाए, वह उन को मिला करे।
17और सब प्रकार की सब से पहिली उपज और सब प्रकार की उठाई हुई वस्तु जो तुम उठा कर चढ़ाओ, याजकों को मिला करे; और नये अन्न का पहिला गूंधा हुआ आटा भी याजक को दिया करना, जिस से तुम लोगों के घर में आशीष हो।
18जो कुछ अपने आप मरे वा फाड़ा गया हो, चाहे पक्षी हो या पशु उसका मांस याजक न खाए।
19जब तुम चिट्ठी डाल कर देश को बांटो, तब देश में से एक भाग पवित्र जान कर यहोवा को अर्पण करना; उसकी लम्बाई पच्चीस हजार बांस की और चौड़ाई दस हजार बांस की हो; वह भाग अपने चारों ओर के सिवाने तक पवित्र ठहरे।
20उस में से पवित्रस्थान के लिये पांच सौ बांस लम्बी और पांच सौ बांस चौड़ी चौकोनी भूमि हो, और उसकी चारों ओर पचास पचास हाथ चौड़ी भूमि छूटी पड़ी रहे।

21उस पवित्र भाग में तुम पच्चीस हाजार बांस लम्बी और दस हजार बांस चौड़ी भूमि को मापना, और उसी में पवित्र स्थान बनाना, जो परमपवित्र ठहरे।
22जो याजक पवित्र स्थान की सेवा टहल करें और यहोवा की सेवा टहल करने को समीप आएं, वह उन्हीं के लिये हो; वहां उनके घरों के लिये स्थान हो और पवित्र स्थान के लिये पवित्र ठहरे।
23फिर पच्चीस हजार बांस लम्बा, और दस हजार बांस चौड़ा एक भाग, भवन की सेवा टहल करने वाले लेवियों की बीस कोठरियों के लिये हो।
24फिर नगर के लिये, अर्पण किए हुए पवित्र भाग के पास, तुम पांच हजार बांस चौड़ी और पच्चीस हाजार बांस लम्बी, विशेष भूमि ठहराना; वह इस्राएल के सारे घराने के लिये हो।
25और प्रधान का निज भाग पवित्र अर्पण किए हुए भाग और नगर की विशेष भूमि की दोनों ओर अर्थात दोनों की पश्चिम और पूर्व दिशाओं में दोनों भागों के साम्हने हों; और उसकी लम्बाई पश्चिम से ले कर पूर्व तक उन दो भागों में से किसी भी एक के तुल्य हो।
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