1हे मनुष्य के सन्तान, तू इस्राएल के घराने को इस भवन का नमूना दिखा कि वे अपने अधर्म के कामों से लज्जित हो कर उस नमूने को मापें।
2और यदि वे अपने सारे कामों से लज्जित हों, तो उन्हें इस भवन का आकार और स्वरूप, और इसके बाहर भीतर आने जाने के मार्ग, और इसके सब आकार और विधियां, और नियम बतलाना, और उनके साम्हने लिख रखना; जिस से वे इसका सब आकार और इसकी सब विधियां स्मरण कर के उनके अनुसार करें।
3भवन का नियम यह है कि पहाड़ की चोटी के चारों ओर का सम्पूर्ण भाग परमपवित्र है। देख भवन का नियम यही है।
4और ऐसे हाथ के माप से जो साधारण हाथ से चौवा भर अधिक हो, वेदी की माप यह है, अर्थात उसका आधार एक हाथ का, और उसकी चौड़ाई एक हाथ की, और उसके चारों ओर की छोर पर की पटरी एक चौवे की। और वेदी की ऊंचाई यह है:
5भूमि पर धरे हुए आधार से ले कर निचली कुसीं तक दो हाथ की ऊंचाई रहे, और उसकी चौड़ाई हाथ भर की हो; और छोटी कुसीं से ले कर बड़ी कुसीं तक चार हाथ हों और उसकी चौड़ाई हाथ भर की हो;

6और उपरला भाग चार हाथ ऊंचा हो; और वेदी पर जलाने के स्थान के चार सींग ऊपर की ओर निकले हों।
7और वेदी पर जलाने का स्थान चौकोर अर्थात बारह हाथ लम्बा और बारह हाथ चौड़ा हो।
8और निचली कुसीं चौदह हाथ लम्बी और चौदह चौड़ी हो, और उसके चारों ओर की पटरी आधे हाथ की हो, और उसका आधर चारों ओर हाथ भर का हो। उसकी सीढ़ी उसकी पूर्व ओर हो।
9फिर उसने मुझ से कहा, हे मनुष्य के सन्तान, परमेश्वर यहोवा यों कहता है, जिस दिन होमबलि चढ़ाने और लोहू छिड़कने के लिये वेदी बनाईं जाए, उस दिन की विधियां ये ठहरें:
10अर्थात लेवीय याजक लोग, जो सादोक की सन्तान हैं, और मेरी सेवा टहल करने को मेरे समीप रहते हैं, उन्हें तू पापबलि के लिये एक बछड़ा देना, परमेश्वर यहोवा की यही वाणी है।

11तब तू उसके लोहू में से कुछ ले कर वेदी के चारों सींगों और कुसीं के चारों कोनों और चारों ओर की पटरी पर लगाना; इस प्रकार से उसके लिये प्रायश्चित्त करने के द्वारा उसको पवित्र करना।
12तब पापबलि के बछड़े को ले कर, भवन के पवित्रस्थान के बाहर ठहराए हुए स्थान में जला देना।
13और दूसरे दिन एक निर्दोष बकरा पापबलि कर के चढ़ाना; और जैसे बछड़े के द्वारा वेदी पवित्र की जाए, वैसे ही वह इस बकरे के द्वारा भी पवित्र की जाएगी।
14जब तू उसे पवित्र कर चूके, तब एक निर्दोष बछड़ा और एक निर्दोष मेढ़ा चढ़ाना।
15तू उन्हें यहोवा के साम्हने ले आना, और याजक लोग उन पर लोन डाल कर उन्हें यहोवा को होमबलि कर के चढ़ाएं।

16सात दिन तक तू प्रति दिन पापबलि के लिये एक बकरा तैयार करना, और निर्दोष बछड़ा और भेड़ों में से निर्दोष मेढ़ा भी तैयार किया जाए।
17सात दिन तक याजक लोग वेदी के लिये प्रायश्चित्त कर के उसे शुद्ध करते रहें; इसी भांति उसका संस्कार हो।
18और जब वे दिन समाप्त हों, तब आठवें दिन के बाद से याजक लोग तुम्हारे होमबलि और मेलबलि वेदी पर चढ़ाया करें; तब मैं तुम से प्रसन्न हूंगा, परमेश्वर यहोवा की यही वाणी है।
19फिर वह मुझे पवित्र स्थान के उस बाहरी फाटक के पास लौटा ले गया, जो पूर्वमुखी है; और वह बन्द था।
20तब यहोवा ने मुझ से कहा, यह फाटक बन्द रहे और खेला न जाए; कोई इस से हो कर भीतर जाने न पाए; क्योंकि इस्राएल का परमेश्वर यहोवा इस से हो कर भीतर आया है; इस कारण यह बन्द रहे।

21केवल प्रधान ही, प्रधान होने के कारण, मेरे साम्हने भोजन करने को वहां बैठेगा; वह फाटक के ओसारे से हो कर भीतर जाए, और इसी से हो कर निकले।
22फिर वह उत्तरी फाटक के पास हो कर मुझे भवन के साम्हने ले गया; तब मैं ने देखा कि यहोवा का भवन यहोवा के तेज से भर गया है; और मैं मुंह के बल गिर पड़ा।
23तब यहोवा ने मुझ से कहा, हे मनुष्य के सन्तान, ध्यान देकर अपनी आंखों से देख, और जो कुछ मैं तुझ से अपने भवन की सब विधियों और नियमों के विषय में कहूं, वह सब अपने कानों से सुन; और भवन के पैठाव और पवित्र स्थान के सब निकासों पर ध्यान दे।
24और उन बलवाइयों अर्थात इस्राएल के घराने से कहना, परमेश्वर यहोवा यों कहता है, हे इस्राएल के घराने, अपने सब घृणित कामों से अब हाथ उठा।
25जब तुम मेरा भोजन अर्थात चर्बी और लोहू चढ़ाते थे, तब तुम बिराने लोगों को जो मन और तन दोनों के खतनाहीन थे, मेरे पवित्रस्थान में आने देते थे कि वे मेरा भवन अपवित्र करें; और उन्होंने मेरी वाचा को तोड़ दिया जिस से तुम्हारे सब घृणित काम बढ़ गए।

26और तूम ने मेरी पवित्र वस्तुओं की रक्षा न की, परन्तु तुम ने अपने ही मन से अन्य लोगों को मेरे पवित्र स्थान में मेरी वस्तुओं की रक्षा करने वाले ठहराया।
27इसलिये परमेश्वर यहोवा यों कहता है, कि इस्राएलियों के बीच जितने अन्य लोग हों, जो मन और तन दोनों के खतनाहीन हैं, उन में से कोई मेरे पवित्र स्थान में न आने पाए।
28परन्तु लेवीय लोग जो उस समय मुझ से दूर हो गए थे, जब इस्राएली लोग मुझे छोड़ कर अपनी मूरतों के पीछे भटक गए थे, वे अपने अधर्म का भार उठाएंगे।
29परन्तु वे मेरे पवित्रस्थान में टहलुए हो कर भवन के फाटकों का पहरा देने वाले और भवन के टहलुए रहें; वे होमबलि और मेलबलि के पशु लोगों के लिये वध करें, और उनकी सेवा टहल करने को उनके साम्हने खड़े हुआ करें।
30क्योंकि इस्राएल के घराने की सेवा टहल वे उनकी मूरतों के साम्हने करते थे, और उनके ठोकर खाने और अधर्म में फंसने का कारण हो गए थे; इस कारण मैं ने उनके विषय में शपथ खाई है कि वे अपने अधर्म का भार उठाएं, परमेश्वर यहोवा की यही वाणी है।

31वे मेरे समीप न आएं, और न मेरे लिये याजक का काम करें; और न मेरी किसी पवित्र वस्तु, वा किसी परमपवित्र वस्तु को छूने पाएं; वे अपनी लज्जा का और जो घृणित काम उन्होंने किए, उनका भी भार उठाएं। तौभी मैं उन्हें भवन में की सौंपी हुई वस्तुओं का रक्षक ठहराऊंगा;
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