1और मैं उनके लिये महान बारियें उपजाऊंगा, और वे देश में फिर भूखों न मरेंगे, और न जाति-जाति के लोग फिर उनकी निन्दा करेंगे।
2और वे जानेंगे कि मैं परमेश्वर यहोवा, उनके संग हूँ, और वे जो इस्राएल का घराना है, वे मेरी प्रजा हैं, मुझ परमेश्वर यहोवा की यही वाणी है।
3तुम तो मेरी भेड़-बकरियां, मेरी चराई की भेड़-बकरियां हो, तुम तो मनुष्य हो, और मैं तुम्हारा परमेश्वर हूँ, परमेश्वर यहोवा की यही वाणी है।
4यहोवा का यह वचन मेरे पास पहुंचा,
5हे मनुष्य के सन्तान, अपना मुंह सेईर पहाड़ की ओर कर के उसके विरुद्ध भविष्यद्वाणी कर,

6और उस से कह, परमेश्वर यहोवा यों कहता है, हे सेईर पहाड़, मैं तेरे विरुद्ध हूँ; और अपना हाथ तेरे विरुद्ध बढ़ा कर तुझे उजाड़ ही उजाड़ कर दूंगा।
7मैं तेरे नगरों को खण्डहर कर दूंगा, और तू उजाड़ हो जाएगा; तब तू जान लेगा कि मैं यहोवा हूँ।
8क्योंकि तू इस्राएलियों से युग-युग की शत्रुता रखता था, और उनकी विपत्ति के समय जब उनके अधर्म के दण्ड का समय पहुंचा, तब उन्हें तलवार से मारे जाने को दे दिया।
9इसलिये परमेश्वर यहोवा की यह वाणी है, मेरे जीवन की सौगन्ध, मैं तुझे हत्या किए जाने के लिये तैयार करूंगा ओर खून तेरा पीछा करेगा; तू तो खून से न घिनाता था, इस कारण खून तेरा पीछा करेगा।
10इस रीति मैं सेईर पहाड़ को उजाड ही उजाड़ कर दूंगा, और जो उस में आता-जाता हो, मैं उसको नाश करूंगा।

11और मैं उसके पहाड़ों को मारे हुओं से भर दूंगा; तेरे टीलों, तराइयों और सब नालों में तलवार से मारे हुए गिरेंगे!
12मैं तुझे युग युग के लिये उजाड़ कर दूंगा, और तेरे नगर फिर न बसेंगे। तब तुम जान लागे कि मैं यहोवा हूँ।
13क्योंकि तू ने कहा है, कि ये दोनों जातियां और ये दोनों देश मेरे होंगे; और हम ही उनके स्वामी हो जाएंगे, यद्यपि यहोवा वहां था।
14इस कारण, परमेश्वर यहोवा की यह वाणी है, मेरे जीवन की सौगनध, तेरे कोप के अनुसार, और जो जलजलाहट तू ने उन पर अपने बैर के कारण की है, उसी के अनुसार मैं तुझ से बर्ताव करूंगा, और जब मैं तेरा न्याय करूं, तब तुम में अपने को प्रगट करूंगा।
15और तू जानेगा, कि मुझ यहोवा ने तेरी सब तिरस्कार की बातें सुनी हैं, जो तू ने इस्राएल के पहाड़ों के विषय में कहीं, कि, वे तो उजड़ गए, वे हम ही को दिए गए हैं कि हम उन्हें खा डालें।

16तुम ने अपने मुंह से मेरे विरुद्ध बड़ाई मारी, और मेरे विरुद्ध बहुत बातें कही हैं; इसे मैं ने सुना है।
17परमेश्वर यहोवा यों कहता है, जब पृथ्वी भर में आनन्द होगा, तब मैं तुझे उजाड़ करूंगा।
18तू इस्राएल के घराने के निज भाग के उजड़ जाने के कारण आनन्दित हुआ, सो मैं भी तुझ से वैसा ही करूंगा; हे सेईर पहाड़, हे एदोम के सारे देश, तू उजाड़ हो जाएगा। तब वे जान लेंगे कि मैं यहोवा हूँ।
19फिर हे मनुष्य के सन्तान, तू इस्राएल के पहाड़ों से भविष्यद्वाणी कर के कह, हे इस्राएल के पहाड़ो, यहोवा का वचन सुनो।
20परमेश्वर यहोवा यों कहता है, शत्रु ने तो तुम्हारे विषय में कहा है, आहा! प्राचीनकाल के ऊंचे स्थान अब हमारे अधिकार में आ गए।

21इस कारण भविष्यद्वाणी कर के कह, परमेश्वर यहोवा यों कहता हे, लोगों ने जो तुम्हें उजाड़ा और चारों ओर से तुम्हें ऐसा निगल लिया कि तुम बची हुई जातियों का अधिकार हो जाओ, और लुतरे तुम्हारी चर्चा करते और साधारण लोग तुम्हारी निन्दा करते हैं;
22इस कारण, हे इस्राएल के पहाड़ो, परमेश्वर यहोवा का वचन सुनो, परमेश्वर यहोवा तुम से यों कहता है, अर्थात पहाड़ों और पहाडिय़ों से और नालों और तराइयों से, और उजड़े हुए खण्डहरों और निर्जन नगरों से जो चारों ओर की बची हुई जातियों से लुट गए और उनके हंसने के कारण हो गए हैं;
23परमेश्वर यहोवा यों कहता है, निश्चय मैं ने अपनी जलन की आग में बची हुई जातियों के और सारे एदोम के विरुद्ध में कहा है कि जिन्होंने मेरे देश को अपने मन के पूरे आनन्द और अभिमान से अपने अधिकार में किया है कि वह पराया हो कर लूटा जाए।
24इस कारण इस्राएल के देश के विषय में भविष्यद्वाणी कर के पहाड़ों, पहाडिय़ों, नालों, और तराइयों से कह, परमेश्वर यहोवा यों कहता है, देखो, तुम ने जातियों की निन्दा सही है, इस कारण मैं अपनी बड़ी जलजलाहट से बोला हूँ।
25परमेश्वर यहोवा यों कहता है, मैं ने यह शपथ खाई है कि नि:सन्देह तुम्हारे चारों ओर जो जातियां हैं, उन को अपनी निन्दा आप ही सहनी पड़ेगी।

26परन्तु, हे इस्राएल के पहाड़ो, तुम पर डालियां पनपेंगी और उनके फल मेरी प्रजा इस्राएल के लिये लगेंगे; क्योंकि उसका लौट आना निकट है।
27और देखो, मैं तुम्हारे पक्ष में हूँ, और तुम्हारी ओर कृपादृष्टि करूंगा, और तुम जोते-बोए जाओगे;
28और मैं तुम पर बहुत मनुष्य अर्थात इस्राएल के सारे घराने को बसाऊंगा; और नगर फिर बसाए और खण्डहर फिर बनाएं जाएंगे।
29और मैं तुम पर मनुष्य और पशु दोनों को बहुत बढ़ाऊंगा; और वे बढ़ेंगे और फूलें-फलेंगे; और मैं तुम को प्राचीनकाल की नाईं बसाऊंगा, और पहिले से अधिक तुम्हारी भलाई करूंगा। तब तुम जान लोगे कि मैं यहोवा हूँ।
30और मैं ऐसा करूंगा कि मनुष्य अर्थात मेरी प्रजा इस्राएल तुम पर चले-फिरेगी; और वे तुम्हारे स्वामी होंगे, और तुम उनका निज भाग होंगे, और वे फिर तुम्हारे कारण निर्वंश न हो जाएंगे।

31परमेश्वर यहोवा यों कहता हे, जो लोग तुम से कहा करते हैं, कि तू मनुष्यों का खाने वाला है, और अपने पर बसी हुई जाति को निर्वंश कर देता है,
32सो फिर तू मनुष्यों को न खाएगा, और न अपने पर बसी हुई जाति को निर्वंश करेगा, परमेश्वर यहोवा की यही वाणी है।
33और मैं फिर जाति-जाति के लोगों से तेरी निन्दा न सुनवाऊंगा, और तुझे जाति-जाति की ओर से फिर नामधराई न सहनी पड़ेगी, और तुझ पर बसी हुई जाति को तू फिर ठोकर न खिलाएगा, परमेश्वर यहोवा की यही वाणी है।
34फिर यहोवा का यह वचन मेरे पास पहुंचा,
35हे मनुष्य के सन्तान, जब इस्राएल का घराना अपने देश में रहता था, तब अपनी चालचलन और कामों के द्वारा वे उसको अशुद्ध करते थे; उनकी चालचलन मुझे ऋतुमती की अशुद्धता सी जान पड़ती थी।

36सो जो हत्या उन्होंने देश में की, और देश को अपनी मूरतों के द्वारा अशुद्ध किया, इसके कारण मैं ने उन पर अपनी जलजलाहट भड़काई।
37और मैं ने उन्हें जाति-जाति में तितर-बितर किया, और वे देश देश में छितर गए; उनके चालचलन और कामों के अनुसार मैं ने उन को दण्ड दिया।
38परन्तु जब वे उन जातियों में पहुंचे जिन में वे पहुंचाए गए, तब उन्होंने मेरे पवित्र नाम को अपवित्र ठहराया, क्योंकि लोग उनके विषय में यह कहने लगे, ये यहोवा की प्रजा हैं, परन्तु उसके देश से निकाले गए हैं।
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