1आमोस ने उत्तर देकर अमस्याह से कहा, मैं ने तो भविष्यद्वक्ता था, और न भविष्यद्वक्ता का बेटा; मैं तो गाय-बैल का चरवाहा, और गूलर के वृक्षों का छांटनेहारा था,
2और यहोवा ने मुझे भेड़-बकरियों के पीछे पीछे फिरने से बुला कर कहा, जा, मेरी प्रजा इस्राएल से भविष्यद्वाणी कर।
3इसलिये अब तू यहोवा का वचन सुन, तू कहता है कि इस्राएल के विरुद्ध भविष्यद्वाणी मत कर; और इसहाक के घराने के विरुद्ध बार बार वचन मत सुना।
4इस कारण यहोवा यों कहता है, तेरी स्त्री नगर में वेश्या हो जाएगी, और तेरे बेटे-बेटियां तलवार से मारी जाएंगी, और तेरी भूमि डोरी डाल कर बांट ली जाएगीं; और तू आप अशुद्ध देश में मरेगा, और इस्राएल अपनी भूमि पर से निश्चय बंधआई में जाएगा॥
5परमेश्वर यहोवा ने मुझ को यों दिखाया: कि, धूपकाल के फलों से भरी हुई एक टोकरी है।

6और उसने कहा, हे आमोस, तुझे क्या देख पड़ता है? मैं ने कहा, धूपकाल के फलों से भरी एक टोकरी। तब यहोवा ने मुझ से कहा, मेरी प्रजा इस्राएल का अन्त आ गया है; मैं अब उसको और न छोडूंगा।
7परमेश्वर यहोवा की वणी है, कि उस दिन राजमन्दिर के गीत हाहाकार में बदल जाएंगे, और लोथों का बड़ा ढेर लगेगा; और सब स्थानों में वे चुपचाप फेंक दी जाएंगी॥
8यह सुनो, तुम जो दरिद्रों को निगलना और देश के नम्र लोगों को नाश करना चाहते हो,
9जो कहते हो नया चांद कब बीतेगा कि हम अन्न बेच सकें? और विश्रामदिन कब बीतेगा, कि हम अन्न के खत्ते खोल कर एपा को छोटा और शेकेल को भारी कर दें, और छल से दण्डी मारें,
10कि हम कंगालों को रूपया देकर, और दरिद्रों को एक जोड़ी जूतियां देकर मोल लें, और निकम्मा अन्न बेचें?

11यहोवा, जिस पर याकूब को घमण्ड करना उचित है, वही अपनी शपथ खाकर कहता है, मैं तुम्हारे किसी काम को किभी न भूलूंगा।
12क्या इस कारण भूमि न कांपेगी? और क्या उन पर के सब रहने वाले विलाप न करेंगे? यह देश सब का सब मिस्र की नील नदी के समान होगा, जो बढ़ती है, फिर लहरें मारती, और घट जाती है॥
13परमेश्वर यहोवा की यह वाणी है, उस समय मैं सूर्य का दोपहर के समय अस्त करूंगा, और इस देश को दिन दुपहरी अन्धियारा कर दूंगा।
14मैं तुम्हारे पर्वों के उत्सव दूर कर के विलाप कराऊंगा, और तुम्हारे सब गीतों को दूर कर के विलाप के गीत गवाऊंगा; मैं तुम सब की कटि में टाट बंधाऊंगा, और तुम सब के सिरों को मुंड़ाऊंगा; और ऐसा विलाप कराऊंगा जैसा एकलौते के लिये होता है, और उसका अन्त कठिन दु:ख के दिन का सा होगा॥
15परमेश्वर यहोवा की यह वाणी है, देखो, ऐसे दिन आते हैं, जब मैं इस देश में महंगी करूंगा; उस में ने तो अन्न की भूख और न पानी की प्यास होगी, परन्तु यहोवा के वचनों के सुनने ही की भूख प्यास होगी।
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