1न तो तेरे हाथ बान्धे गए, और न तेरे पांवों में बेडिय़ां डाली गई; जैसे कोई कुटिल मनुष्यों से मारा जाए, वैसे ही तू मारा गया।
2तब सब लोग उसके विषय फिर रो उठे। तब सब लोग कुछ दिन रहते दाऊद को रोटी खिलाने आए; परन्तु दाऊद ने शपथ खाकर कहा, यदि मैं सूर्य के अस्त होने से पहिले रोटी वा और कोई वस्तु खाऊं, तो परमेश्वर मुझ से ऐसा ही, वरन इस से भी अधिक करे।
3और सब लोगों ने इस पर विचार किया और इस से प्रसन्न हुए, वैसे ही जो कुछ राजा करता था उस से सब लोग प्रसन्न होते थे।
4तब उन सब लोगों ने, वरन समस्त इस्राएल ने भी, उसी दिन जान लिया कि नेर के पुत्र अब्नेर का घात किया जाना राजा की और से नहीं हुआ।
5और राजा ने अपने कर्मचारियों से कहा, क्या तुम लोग नहीं जानते कि इस्राएल में आज के दिन एक प्रधान और प्रतापी मनुष्य मरा है?

6और यद्यपि मैं अभिषिक्त राजा हूँ तौभी आज निर्बल हूँ; और वे सरूयाह के पुत्र मुझ से अधिक प्रचण्ड हैं। परन्तु यहोवा बुराई करने वाले को उसकी बुराई के अनुसार ही पलटा दे।
7जब शाऊल के पुत्र ने सुना, कि अब्नेर हेब्रोन में मारा गया, तब उसके हाथ ढीले पड़ गए, और सब इस्राएली भी घबरा गए।
8शाऊल के पुत्र के दो जन थे जो दलों के प्रधान थे; एक का नाम बाना, और दूसरे का नाम रेकाब था, ये दोनों बेरोतवासी बिन्यामीनी रिम्मोन के पुत्र थे, ( क्योंकि बेरोत भी बिन्यामीन के भाग में गिना जाता है;
9और बेरोती लोग गितैम को भाग गए, और आज के दिन तक वहीं परदेशी हो कर रहते हैं।)
10शाऊल के पुत्र योनातन के एक लंगड़ा बेटा था। जब यिज्रेल से शाऊल और योनातन का समाचार आया तब वह पांच वर्ष का था; उस समय उसकी धाई उसे उठा कर भागी; और उसके उतावली से भागने के कारण वह गिर के लंगड़ा हो गया। और उसका नाम मपीबोशेत था।

11उस बेरोती रिम्मोन के पुत्र रेकाब और बाना कड़े घाम के समय ईशबोशेत के घर में जब वह दोपहर को विश्राम कर रहा था आए।
12और गेहूं ले जाने के बहाने मे घर में घुस गए; और उसके पेट में मारा; तब रेकाब और उसका भाई बाना भाग निकले।
13जब वे घर में घुसे, और वह सोने की कोठरी में चारपाई पर सोता था, तब अन्होंने उसे मार डाला, और उसका सिर काट लिया, और उसका सिर ले कर रातोंरात अराबा के मार्ग से चले।
14और वे ईशबोशेत का सिर हेब्रोन में दाऊद के पास ले जा कर राजा से कहने लगे, देख, शाऊल जो तेरा शत्रु और तेरे प्राणों का ग्राहक था, उसके पुत्र ईशबोशेत का यह सिर है; तो आज के दिन यहोवा ने शाऊल और उसके वंश से मेरे प्रभु राजा का पलटा लिया है।
15दाऊद ने बेरोती रिम्मोन के पुत्र रेकाब और उसके भाई बाना को उत्तर देकर उन से कहा, यहोवा जो मेरे प्राण को सब विपत्तियों से छुड़ाता आया है, उसके जीवन की शपथ,

16जब किसी ने यह जानकर, कि मैं शुभ समाचार देता हूं, सिकलग में मुझ को शाऊल के मरने का समाचार दिया, तब मैं ने उसको पकड़कर घात कराया; अर्थात उसको समाचार का यही बदला मिला।
17फिर जब दुष्ट मनुष्यों ने एक निर्दोष मनुष्य को उसी के घर में, वरन उसकी चारपाई ही पर घात किया, तो मैं अब अवश्य ही उसके खून का पलटा तुम से लूंगा, और तुम्हें धरती पर से नष्ट कर डालूंगा।
18तब दाऊद ने जवानों को आज्ञा दी, और उन्होंने उन को घात करके उनके हाथ पांव काट दिए, और उनकी लोथों को हेब्रोन के पोखरे के पास टांग दिया। तब ईशबोशेत के सिर को उठा कर हेब्रोन में अब्नेर की कब्र में गाड़ दिया।
19( दाऊद के यरूशलेम में राज्य करने का आरम्भ ) तब इस्राएल के सब गोत्र दाऊद के पास हेब्रोन में आकर कहने लगे, सुन, हम लोग और तू एक ही हाड़ मांस हैं।
20फिर भूतकाल में जब शाऊल हमारा राजा था, तब भी इस्राएल का अगुवा तू ही था; और यहोवा ने तुझ से कहा, कि मेरी प्रजा इस्राएल का चरवाहा, और इस्राएल का प्रधान तू ही होगा।

21सो सब इस्राएली पुरनिये हेब्रोन में राजा के पास आए; और दाऊद राजा ने उनके साथ हेब्रोन में यहोवा के साम्हने वाचा बान्धी, और उन्होंने इस्राएल का राजा होने के लिये दाऊद का अभिषेक किया।
22दाऊद तीस वर्ष का हो कर राज्य करने लगा, और चालीस वर्ष तक राज्य करता रहा।
23साढ़े सात वर्ष तक तो उसने हेब्रोन में यहूदा पर राज्य किया, और तैंतीस वर्ष तक यरूशलेम में समस्त इस्राएल और यहूदा पर राज्य किया।
24तब राजा ने अपने जनों को साथ लिए हुए यरूशलेम को जा कर यबूसियों पर चढ़ाई की, जो उस देश के निवासी थे। उन्होंने यह समझकर, कि दाऊद यहां पैठ न सकेगा, उस से कहा, जब तक तू अन्धे और लंगड़ों को दूर न करे, तब तक यहां पैठने न पाएगा।
25तौभी दाऊद ने सिय्योन नाम गढ़ को ले लिया, वही दाऊदपुर भी कहलाता है।
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