1अब्दोन, जिक्री,हानान।
2हनन्याह, एलाम, अन्तोतिय्याह।
3यिपदयाह और पनूएल जो शाशक के पुत्र थे।
4और शमशरै, शहर्याह, अतल्याह।
5योरेश्याह, एलिय्याह और जिक्र जो यरोहाम के पुत्र थे।

6ये अपनी अपनी पीढ़ी में अपने अपने पितरों के घरानों में मुख्य पुरुष और प्रधान थे, ये यरूशलेम में रहते थे।
7और गिबोन में गिबोन का पिता रहता था, जिसकी पत्नी का ताम माका था।
8और उसका जेठा पुत्र अब्दोन था, फिर शूर, कीश, बाल, नादाब।
9गदोर; अह्यो और जेकेर हुए।
10और मिकोत से शिमा उत्पन्न हुआ। और ये भी अपने भाइयों के साम्हने यरूशलेम में रहते थे, अपने भाइयों ही के साथ।

11और नेर से कीश उत्पन्न हुआ, कीश से शाऊल, और शाऊल से योनातान, मलकीश, अबीनादाब, और एशबाल उत्पन्न हुआ।
12और योनातन का पुत्र मरीब्बाल हुआ, और मरीब्बाल से मीका उत्पन्न हुआ।
13और मीका के पुत्र पीतोन, मेलेक, तारे और आहाज।
14और आहाज से यहोअद्दा उत्पन्न हुआ। और यहोअद्दा से आलेमेत, अजमावेत और जिम्री; और जिम्री से मोसा।
15मोसा से बिना उत्पन्न हुआ। और इसका पुत्र रापा हुआ, रापा का एलासा और एलासा का पुत्र आसेल हुआ।

16और आसेल के छ: पुत्र हुए जिनके ये नाम थे, अर्थात अज्रीकाम, बोकरू, यिश्माएल, शार्याह, ओबद्याह, और हानान। ये ही सब आसेल के पुत्र थे।
17ओर उसके भाई एशेक के ये पुत्र हुए, अर्थात उसका जेठा ऊलाम, दूसरा यूशा, तीसरा एलीपेलेत।
18और ऊलाम के पुत्र शूरवीर और धनुर्धारी हुए, और उनके बहुत बेटे-पोते अर्थात डेढ़ सौ हुए। ये ही सब बिन्यामीन के वंश के थे।
19इस प्रकार सब इस्राएली अपनी अपनी वंशावली के अनुसार, जो इस्राएल के राजाओं के वृत्तान्त की पुस्तक में लिखी हैं, गिने गए। और यहूदी अपने विश्वासघात के कारण बन्धुआई में बाबुल को पहुंचाए गए।
20जो लोग अपनी अपनी निज भूमि अर्थात अपने नगरों में रहते थे, वह इस्राएली, याजक, लेवीय और नतीन थे।

21और यरूशलेम में कुछ यहूदी; कुछ बिन्यामीन, और कुछ एप्रैमी, और मनश्शेई, रहते थे:
22अर्थात यहूदा के पुत्र पेरेस के वंश में से अम्मीहूद का पुत्र ऊतै, जो ओम्री का पुत्र, और इम्री का पोता, और बानी का परपोता था।
23और शीलोइयों में से उसका जेठा पुत्र असायाह और उसके पुत्र।
24और जेरह के वंश में से यूएल, और इनके भाई, ये छ: सौ नब्बे हुए।
25फिर बिन्यामीन के वंश में से सल्लू जो मशुल्लाम का पुत्र, होदय्याह का पोता, और हस्सनूआ का परपोता था।

26और यिब्रिय्याह जो यरोहाम का पुत्र था, एला जो उज्जी का पुत्र, और मिक्री का पोता था, और मशुल्लाम जो शपत्याह का पुत्र, रूएल का पोता, और यिब्निय्याह का परपोता था;
27और इनके भाई जो अपनी अपनी वंशावली के अनुसार मिलकर नौ सौ छप्पन। ये सब पुरुष अपने अपने पितरों के घरानों के अनुसार पितरों के घरानों में मुख्य थे।
28और याजकों में से यदायाह, यहोयारीब और याकीन,
29और अजर्याह जो परमेश्वर के भवन का प्रधान और हिलकिय्याह का पुत्र था, यह पशुल्लाम का पुत्र, यह सादोक का पुत्र, यह मरायोत का पुत्र, यह अहीतूब का पुत्र था।
30और अदायाह जो यरोहाम का पुत्र था, यह पशहूर का पुत्र, यह मल्कियाह का पुत्र, यह मासै का पुत्र, यह अदोएल का पुत्र, यह जेरा का पुत्र, यह पशुल्लाम का पुत्र, यह मशिल्लीत का पुत्र, यह इम्मेर का पुत्र था।

31और उनके भाई थे, जो अपने अपने पितरों के घरानों में सत्रह सौ साठ मुख्य पुरुष थे, वे परमेश्वर के भवन की सेवा के काम में बहुत निपुण पुरुष थे।
32फिर लेवियों में से मरारी के वंश में से शमायाह जो हश्शूव का पुत्र, अज्रीकाम का पोता, और हशय्याह का परपोता था।
33और बकबक्कर, हेरेश और गालाल और आसाप के वंश में से मत्तन्याह जो मीका का पुत्र, और जिक्री का पोता था।
34और ओबद्याह जो शमायाह का पुत्र, गालाल का पोता और यदूतून का परपोता था, और बेरेक्याह जो आसा का पुत्र, और एल्काना का पोता था, जो नतोपाइयों के गांवों में रहता था।
35ओर द्वारपालों में से अपने अपने भाइयों सहित शल्लूम, अक्कूब, तल्मोन और अहीमान, उन में से मुख्य तो शल्लूम था।

36और वह अब तक पूर्व ओर राजा के फाटक के पास द्वारपाली करता था। लेवियों की छावनी के द्वारपाल ये ही थे।
37और शल्लूम जो कोरे का पुत्र, एब्यासाप का पोता, और कोरह का परपोता था, और उसके भाई जो उसके मूलपुरुष के घराने के अर्थात कोरही थे, वह इस काम के अधिकारी थे, कि वे तम्बू के द्वारपाल हों। उनके पुरखा तो यहोवा की छावनी के अधिकारी, और पैठाव के रखवाले थे।
38और अगले समय में एलीआज़र का पुत्र पीनहास जिसके संग यहोवा रहता था वह उनका प्रधान था।
39मेशेलेम्याह का पुत्र जकर्याह मिलापवाले तम्बू का द्वारपाल था।
40ये सब जो द्वारपाल होने को चुने गए, वह दो सौ बारह थे। ये जिनके पुरखाओं को दाऊद और शमूएल दशीं ने विश्वासयोग्य जान कर ठहराया था, वह अपने अपने गांव में अपनी अपनी वंशावली के अनुसार गिने गए।

41सो वे और उनकी सन्तान यहोवा के भवन अर्थात तम्बू के भवन के फाटकों का अधिकार बारी बारी रखते थे।
42द्वारपाल पूर्व, पश्चिम, उत्तर, दक्खिन, चारों दिशा की ओर चौकी देते थे।
43ओर उनके भाई जो गांवों में रहते थे, उन को सात सात दिन के बाद बारी बारी से उनके संग रहने के लिये आना पड़ता था।
44क्योंकि चारों प्रधान द्वारपाल जो लेवीय थे, वे विश्वासयोग्य जान कर परमेश्वर के भवन की कोठरियों और भण्डारों के अधिकारी ठहराए गए थे।
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