1सातवीं यसरेला के नाम पर निकली जिसके पुत्र और भाई उस समेत बारह थे।
2आठवीं यशायाह के नाम पर निकली जिसके पुत्र और भाई उस समेत बारह थे।
3नौवीं मतन्याह के नाम पर निकली, जिसके पुत्र और भाई समेत बारह थे।
4दसवीं शिमी के नाम पर निकली जिसके पुत्र और भाई उस समेत बारह थे।
5ग्यारहवीं अजरेल के नाम पर निकली जिसके पुत्र और भाई उस समेत बारह थे।

6बारहवीं हशब्याह के नाम पर निकली, जिसके पुत्र और भाई उस समेत बारह थे।
7तेरहवी शूबाएल के नाम पर निकली, जिसके पुत्र और भाई उस समेत बारह थे।
8चौदहवीं मत्तिय्याह के नाम पर निकली जिसके पुत्र और भाई उस समेत बारह थे।
9पन्द्रहवीं यरेमोत के नाम पर निकली जिसके पुत्र और भाई उस समेत बारह थे।
10सोलहवीं हनन्याह के नाम पर निकली, जिसके पुत्र और भाई उस समेत बारह थे।

11सत्रहवीं योशबकाशा के नाम पर निकली जिसके पुत्र और भाई उस समेत बारह थे।
12अठारहवीं हरानी के नाम पर निकली जिसके पुत्र और भाई उस समेत बारह थे।
13उन्नीसवीं मल्लोती के नाम पर निकली, जिसके पुत्र और भाई उस समेत बारह थे।
14बीसवीं इलिय्याता के नाम पर निकली जिसके पुत्र और भाई उस समेत बारह थे।
15इक्कीसवीं होतीर के नाम पर निकली जिसके पुत्र और भाई उस समेत बारह थे।

16बाईसवीं गिद्दलती के नाम पर तिकली जिसके पुत्र और भाई उस समेत बारह थे।
17तेईसवीं महजीओत के नाम पर निकली जिसके पुत्र और भाई उस समेत बारह थे।
18और चौबीसवीं चिट्ठी रोममतीएजेर के नाम पर निकली जिसके पुत्र और भाई उस समेत बारह थे।
19फिर द्वारपालों के दल ये थे: कोरहियों में से तो मशेलेम्याह, जो कोरे का पुत्र और आसाप के सन्तानों में से था।
20और मशेलेम्याह के पुत्र हुए, अर्थात उसका जेठा जकर्याह दूसरा यदीएल, तीसरा जवद्याह,

21चौथा यतीएल, पांचवां एलाम, छठवां यहोहानान और सातवां एल्यहोएनै।
22फिर ओबेदेदोम के भी पुत्र हुए, उसका जेठा शमायाह, दूसरा यहोजाबाद, तीसरा योआह, चौथा साकार, पांचवां नतनेल,
23छठवां अम्मीएल, सातवां इस्साकार और आठवां पुल्लतै, क्योंकि परमेश्वर ने उसे आशीष दी थी।
24और उसके पुत्र शमायाह के भी पुत्र उत्पन्न हुए, जो शूरवीर होने के कारण अपने पिता के घराने पर प्रभुता करते थे।
25शमायाह के पुत्र ये थे, अर्थात ओती, रपाएल, ओबेद, एलजाबाद और उनके भाई एलीहू और समक्याह बलवान पुरुष थे।

26ये सब आबेदेदोम की सन्तान में से थे, वे और उनके पुत्र और भाई इस सेवकाई के लिये बलवान और शक्तिमान थे; ये ओबेदेदोमी बासठ थे।
27और मशेलेम्याह के पुत्र और भाई अठारह थे, जो बलवान थे।
28फिर मरारी के वंश में से होसा के भी पुत्र थे, अर्थात मुख्य तो शिम्री ( जिस को जेठा न होने पर भी उसके पिता ने मुख्य ठहराया ),
29दूसरा हिल्किय्याह, तीसरा तबल्याह और चौथा जकर्याह था; होसा के सब पुत्र और भाई मिलकर तेरह थे।
30द्वारपालों के दल इन मुख्य पुरुषों के थे, ये अपने भाइयों के बराबर ही यहोवा के भवन में सेवा टहल करते थे।

31इन्होंने क्या छोटे, क्या बड़े, अपने अपने पितरों के घरानों के अनुसार एक एक फाटक के लिये चिट्ठी डाली।
32पूर्व की ओर की चिट्ठी शेलेम्याह के नाम पर निकली। तब उन्होंने उसके पुत्र जकर्याह के नाम की चिट्ठी डाली ( वह बुद्धिमान मंत्री था ) और चिट्ठी उत्तर की ओर के लिये निकली।
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