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1Chronicles

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1Chronicles 25·Hindi Bible

1पन्द्रहवीं बिल्गा के, सोलहवीं इम्मेर के,

2सतरहवीं हेजीर के, अठारहवीं हप्पित्सेस के,

3उन्नीसवीं पतह्याह के, बीसवीं यहेजकेल के,

4इक्कीसवीं याकीन के, बाईसवीं गामूल के,

5तेईसवीं दलायाह के, और चौबीसवीं साज्याह के नाम पर निकलीं।

1Chronicles 25 illustration - 1Chronicles Chapter 25

6उनकी सेवकाई के लिये उनका यही नियम ठहराया गया कि वे अपने उस नियम के अनुसार जो इस्राएल के परमेश्वर यहोवा की आज्ञा के अनुसार उनके मूलपुरुष हारून ने चलाया था, यहोवा के भवन में जाया करें।

7बचे हुए लेवियों में से अम्राम के वंश में से शूबाएल, शूबाएल के वंश में से येहदयाह।

8बचा रहब्याह, सोरहब्याह, के वंश में से यिश्शिय्याह मुख्य था।

9इसहारियों में से शलोमोत और हालोमोत के वंश में से यहत।

10और हेब्रोन के वंश में से मुख्य तो यरिय्याह, दूसरा अमर्याह, तीसरा यहजीएल, और चौथा यकमाम।

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11उज्जीएल के वंश में से मीका और मीका के वंश में से शामीर।

12मीका का भाई यिश्शिय्याह, यिश्शिय्याह के वंश में से जकर्याह।

13मरारी के पुत्र महली और मूशी और याजिय्याह का पुत्र बिनो था।

14मरारी के पुत्र: याजिय्याह से बिनो और शोहम, जक्कू और इब्री थे।

15महली से, एलीआजर जिसके कोई पुत्र न था।

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16कीश से कीश के वंश में यरह्योल।

17और मूशी के पुत्र, महली, एदेर और यरीमोत। अपने अपने पितरो के घरानों के अनुसार ये ही लेवीय सन्तान के थे।

18इन्होंने भी अपने भाई हारून की सन्तानों की नाईं दाऊद राजा और सादोक और अहीमेलेक और याजकों और लेवियों के पितरों के घरानों के मुख्य पुरुषों के साम्हने चिट्ठियां डालीं, अर्थात मुख्य पुरुष के पितरों का घराना उसके छोटे भाई के पितरों के घराने के बराबर ठहरा।

19फिर दाऊद और सेनापतियोंने आसाप, हेमान और यदूतून के कितने पुत्रोंको सेवकाई के लिथे अलग किया कि वे वीणा, सारंगी और फांफ बजा बजाकर नबूवत करें। और इस सेवकाई के काम करनेवाले मनुष्योंकी गिनती यह यी :

20अर्यात्‌ आसाप के पुत्रोंमें से तो जक्कूर, योसेप, नतन्याह और अशरेला, आसाप के थे पुत्र आसाप ही की आज्ञा में थे, जो राजा की आज्ञा के अनुसार नबूवत करता या।

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21फिर यदूतून के पुत्रोंमें से गदल्याह, सरीयशायाह, हसब्याह, मत्तित्याह, थे ही छ: अपके पिता यदूतून की आज्ञा में होकर जो यहोवा का धन्यवाद और स्तुति कर करके नबूवत करता या, वीणा बजाते थे।

22और हेमान के पुत्रोंमें से, मुक्किय्याह, मत्तन्याह, लज्जीएल, शबूएल, यरीमोत, हनन्याह, हनानी, एलीआता, गिद्दलती, रोममतीएजेर, योशबकाशा, मल्लोती, होतीर और महजीओत।

23परमेश्वर की प्रतिज्ञानुकूल जो उसका नाम बढ़ाने की यी, थे सब हेमान के पुत्र थे जो राजा का दशीं या; क्योंकि परमेश्वर ने हेमान को चौदह बेटे और तीन बेटियां दीं यीं।

24थे सब यहोवा के भवन में गाने के लिथे अपके अपके पिता के अधीन रहकर, परमेश्वर के भवन, की सेवकाई में फांफ, सारंगी और वीणा बजाते थे। और आसाप, यदूतून और हेमान राजा के अधीन रहते थे।

25इन सभोंकी गिनती भाइयोंसमेत जो यहोवा के गीत सीखे हुए और सब प्रकार से निपुण थे, दो सौ अठासी यी।

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26और उन्होंने क्या बड़ा, क्या छोटा, क्या गुरू, क्या चेला, अपक्की अपक्की बारी के लिथे चिट्ठी डाली।

27और पहिली चिट्ठी आसाप के बेटोंमें से योसेप के नाम पर निकली, दूसरी गदल्याह के नाम पर निकली जिसके पुत्र और भाई उस समेत बारह थे।

28तीसरी जक्कूर के नाम पर निकली जिसके पुत्र और भाई उस समेत बारह थे।

29चौयी यिस्री के नाम पर निकली जिसके पुत्र और भाई उस समेत बारह थे।

30पांचक्कीं नतन्याह के नाम पर निकली जिसके पुत्र और भाई उस समेत बारह थे।

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31छठीं बुक्किय्याह के नाम पर निकली जिसके पुत्र और भाई उस समेत बारह थे।

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